जैसा कि इस सदन के माननीय सदस्यों को ज्ञात होगा, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2025 में अमेरिका यात्रा के बाद से, भारत और अमेरिका एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को संपन्न करने के उद्देश्य से नियमित रूप से चर्चा में लगे हुए हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों की वार्ता टीमों ने पिछले एक वर्ष में विभिन्न स्तरों पर गहन बातचीत की है। दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण और विविध हितों को देखते हुए, यह स्वाभाविक है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सर्वोत्तम संभव परिणाम सुनिश्चित करना चाहेंगे।

इन वार्ताओं के दौरान, भारतीय पक्ष विशेष रूप से अपने कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा। अमेरिकी पक्ष के लिए भी कुछ ऐसे क्षेत्र थे जो उसके दृष्टिकोण से संवेदनशील थे।
कई दौरों में फैली लगभग एक साल लंबी चर्चा के बाद, दोनों वार्ताकार दल अपने मतभेदों को काफी हद तक कम करने और द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सक्षम रहे।
परसों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर फोन पर चर्चा की। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका को भारतीय निर्यात पर 18% की कम दर की घोषणा की।
मैं इस बात पर विशेष जोर देना चाहता हूं कि यह दर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाए गए शुल्कों से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होती है। यह समझौता भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों और विनिर्माण में, महत्वपूर्ण तुलनात्मक लाभ भी प्रदान करता है।
मैं इस सम्मानित सदन को यह दोहराना चाहता हूँ कि खाद्य और कृषि क्षेत्र में भारत की प्रमुख संवेदनशीलता का पूर्णतः ध्यान रखा गया है। साथ ही, यह साझेदारी लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्यमियों, कुशल श्रमिकों और उद्योग जगत के लिए नए अवसर खोलेगी, उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुँच को सुगम बनाएगी और भारत के ‘मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’, ‘डिजाइन इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ और ‘इनोवेट इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक होगी।
इसलिए, यह ऐतिहासिक ढांचागत समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारी यात्रा को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच मजबूत जुड़ाव को भी दर्शाता है, जो स्वाभाविक साझेदार हैं और साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
मैं माननीय सदस्यों को सूचित करना चाहता हूँ कि आगे की कार्रवाई के संदर्भ में, दोनों पक्ष व्यापार समझौते से संबंधित आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करने और कागजी कार्रवाई को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे, ताकि इसकी पूरी क्षमता का शीघ्रता से लाभ उठाया जा सके। इन प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के तुरंत बाद समझौते की विस्तृत रूपरेखा की घोषणा की जाएगी।

माननीय सदस्यों को इस समझौते पर हुई चर्चाओं के दौरान भारत की ऊर्जा स्रोतों से संबंधित उठाए गए मुद्दों की जानकारी होगी। मैं एक बार फिर स्पष्ट करना चाहता हूँ, जैसा कि सरकार ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है, कि 14 लाख भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बाजार की वस्तुनिष्ठ परिस्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का मूल आधार है। भारत के सभी कदम इसी बात को ध्यान में रखकर उठाए जाते हैं। अतः मैं माननीय सदस्यों से इन मुद्दों पर उचित परिप्रेक्ष्य में विचार करने का आग्रह करता हूँ।
अमेरिका से माल खरीदने के संदर्भ में, माननीय सदस्यगण इस बात को समझेंगे कि भारत और अमेरिका काफी हद तक एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं। भारत के विकसित भारत बनने की राह पर आगे बढ़ते हुए, हमें ऊर्जा, विमानन, डेटा सेंटर, परमाणु ऊर्जा आदि कई क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को व्यापक रूप से बढ़ाने की आवश्यकता होगी।
इन क्षेत्रों में अमेरिका विश्व का अग्रणी देश है और इसलिए हमारे लिए इन क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना स्वाभाविक है, जिससे न केवल हमारी सोर्सिंग में बल्कि हमारे अपने निर्यात में भी विस्तार होगा।
विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ यह ढांचागत समझौता, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास और नवाचार को गति प्रदान करता रहेगा, भारत की जनता के व्यापक राष्ट्रीय हित में है। यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत दोनों को सशक्त बनाता है। हम अपने देश के लिए माननीय प्रधानमंत्री के इस दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य करते रहेंगे।












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