वाराणसी: प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। मामला शिवपुर थाने में दर्ज FIR संख्या 524/2024 से जुड़ा है, जहाँ पुलिस की ‘अन्तर्यामी’ शक्ति और सत्ता के रसूख के आगे न्याय बौना पड़ता दिखाई दे रहा है। आरोप है कि हत्या के एक पुराने मामले में खुद को बचाने के लिए महादेव पीजी कॉलेज के मालिक अजय सिंह पुलिस के जरिए गवाहों पर दबाव बना रहे हैं।
अज्ञात तहरीर और पुलिस की ‘जादुई’ कार्रवाई शिवपुर थाने में दर्ज इस मुकदमे की तहरीर में जिस अपराध को ‘अज्ञात’ व्यक्तियों द्वारा किया गया बताया गया था, पुलिस ने उसमें बड़ी मुस्तैदी से उन लोगों को नामजद कर दिया जिनसे अजय सिंह की पुरानी अदावत है। सवाल उठता है कि जिस चेहरे को वादी ने नहीं पहचाना, उसे पुलिस ने इतनी जल्दी कैसे पहचान लिया?
गवाहों को खामोश करने की साजिश? इस पूरे मामले के पीछे का सच बेहद चौंकाने वाला है। जिन कीर्तिभूषण सिंह और श्वेता रश्मि को इस नई FIR में फंसाया गया है, उनका प्रोफाइल देखिए:
• कीर्तिभूषण सिंह: अजय सिंह पर दर्ज हत्या के मामले (302 IPC) के वादी मुकदमा हैं।
• श्वेता रश्मि: उस हत्या के मामले में मुख्य चश्मदीद गवाह हैं।
तारीखों का खेल: जब गवाही, तभी FIR अगर हम कैंट थाने के क्राइम नंबर 66/22 (विभूति सिंह हत्या मामला) की सुनवाई और शिवपुर की इस नई FIR की तारीखों का मिलान करें, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है। जिस दिन अदालत में हत्यारोपी अजय सिंह के खिलाफ गवाही की तारीख होती है, ठीक उसी के आसपास पुलिस एक नई FIR दर्ज कर गवाहों को डराने का काम करती है।
क्या है विभूति सिंह हत्या मामला? चर्चाओं में रहने वाले महादेव पीजी कॉलेज के मालिक अजय सिंह पर कीर्तिभूषण सिंह ने अपने भाई विभूति सिंह की हत्या का आरोप लगाया था। हालांकि पुलिस ने इस मामले में ‘रोड एक्सीडेंट’ की चार्जशीट दाखिल कर बचाव की कोशिश की थी, लेकिन मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है। अब इसी मामले को कमजोर करने के लिए पेशबंदी में मुकदमे दर्ज करवाने का आरोप लग रहा है।











Users Today : 34
Users This Year : 11455
Total Users : 24048
Views Today : 91
Total views : 47171