लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम बनाने होंगे। जो स्कूल ऐसा नहीं कर पाएंगे, उनकी मान्यता रद्द की जाएगी।
इसके साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल में दिव्यांगों के अनुकूल (डिसेबल फ्रेंडली) टॉयलेट बनाए जाएं।
केंद्र सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता नीति (Menstrual Hygiene Policy) को पूरे देश में लागू करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में पिछले 4 सालों से सुनवाई चल रही थी। कोर्ट ने आज सिर्फ फैसला सुनाया है।
सोशल वर्कर जया ठाकुर ने 2022 में एक जनहित याचिका लगाई थी। उनकी मांग थी कि मेन्स्ट्रुयल हाइजीन पॉलिसी को पूरे देश में लागू किया जाए।











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