वाराणसी चौबेपुर थाना क्षेत्र के बभनपुरा गांव में हिस्ट्रीशीटर गौरव सिंह मोनू पर हुई फायरिंग और पुलिस की लापरवाही ने महकमे की किरकिरी करा दी है। आरोप है कि गौरव के पिता द्वारा दी गई तहरीर को चौकी इंचार्ज अंकुर कुशवाहा ने गंभीरता से न लेकर सीधे कूड़ेदान में डाल दिया। इस बड़ी चूक को देखते हुए डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार ने शनिवार को चौकी इंचार्ज को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए।
वर्चस्व की जंग से बढ़ा विवाद सूत्रों के अनुसार, गौरव सिंह मोनू और अंकित सिंह गुट के बीच लंबे समय से वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। इसी तनातनी में शुक्रवार देर रात विवाद इतना बढ़ा कि अंकित सिंह और उसके साथियों ने गाली-गलौज के बाद गौरव पर गोलियां चला दीं।
पुलिस की बड़ी लापरवाही
गौरव के पिता ने तुरंत चौकी में तहरीर दी, लेकिन चौकी इंचार्ज की लापरवाही ने न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए बल्कि आरोपियों के हौसले और बुलंद हो गए। परिणामस्वरूप, हमलावरों ने गौरव पर दोबारा हमला करने की भी कोशिश की।
तीन टीमें लगीं आरोपियों की तलाश में डीसीपी वरुणा ने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसओजी, सर्विलांस और थाना पुलिस की तीन संयुक्त टीमें बनाई गई हैं। लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने सख्त लहजे में साफ कहा कि “लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
व्यापारियों ने जताई चिंता उधर, जाल्हूपुर बाजार के व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन के साथ बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की। उनका कहना है कि क्षेत्र में डर का माहौल है। चौकी प्रभारी मनीष कुमार मिश्रा ने आश्वासन दिया कि व्यापारी निश्चिंत होकर कारोबार करें, पुलिस 24 घंटे गश्त और निगरानी करेगी।
बड़ा सवाल यह पूरा मामला बताता है कि जब जनता की तहरीर कूड़ेदान में फेंकी जाती है तो अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हो जाते हैं। अब नज़रें पुलिस पर हैं कि वह कितनी जल्दी आरोपियों को पकड़कर जनता का भरोसा बहाल करती है।










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