पार्षद पुत्र को फंसाने की साजिश? दरोगा के बयान ने खड़े किए गंभीर सवाल, घायल युवक अस्पताल में भर्ती

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वाराणसी,    हुकुलगंज वार्ड नंबर 11 के पार्षद बृजेश चंद श्रीवास्तव के पुत्र को साजिश के तहत फंसाए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है पार्षद का कहना है कि मैं और मेरा पुत्र क्षेत्र के ही एक सम्मानित व्यक्ति संतोषः सेठ के पिता की शव अंत्येष्टि के लिए घाट गये हुए थे, कुछ सामान लेने के लिए वह गया था जहाँ चौकी प्रभारी से कुछ बाते होने के बाद वह वापस जाने लगा तभी चौकी प्रभारी के पास पहले से खड़े लकड़ी दुकानदारों द्वारा उसके साथ मारपीट की गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और वर्तमान में अस्पताल में भर्ती है।

आरोप है कि घटना के बाद पीड़ित को न्याय देने के बजाय पुलिस ने उल्टे उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। पार्षद का कहना है कि लकड़ी दुकानदार सादे वर्दी में दरोगा के सिपहसलार की तरह काम करते हैं जो खुद दरोगा जी ने सबके सामने थाने में बोला था इनके बातों से यह साफ प्रतीत हो रहा है कि उन्हीं के इशारे पर यह कार्रवाई की गई है वहीं,चौकी प्रभारी अभिषेक त्रिपाठी के बयान ने पूरे मामले को और विवादास्पद बना दिया है। दरोगा का कहना है कि पार्षद पुत्र ने उन्हें गली में दौड़ा कर मारने की कोशिश की,

जिससे जान बचाने के लिए उन्हें दुकान में घुसना पड़ा। इस दावे को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा है कि यदि एक 20 वर्षीय युवक किसी दरोगा को दौड़ा कर मार सकता है, तो फिर वही दरोगा चौकी की जिम्मेदारी कैसे निभा रहा है।स्थानीय नागरिकों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह मामला मनगढ़ंत कहानी के सहारे एक घायल युवक को फंसाने का प्रतीत हो रहा है। उन्होंने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच की मांग की है।लेकिन अभी तक कोई फुटेज प्रस्तुत नही किया गया जिसमें मेरे बेटे द्वारा ऐसा किया गया है। वही पार्षद बृजेश चंद श्रीवास्तव ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने और दोषियों पर कार्रवाई की अपील की है।

 

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

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