वाराणसी
वाराणसी की पवित्र नगरी में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना ने पूरे समाज को हिला दिया है। दलित समुदाय की 9 साल की मासूम बच्ची को उसके ही पड़ोसी, 65 वर्षीय मुस्लिम हकीम ने रात के अंधेरे में बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाकर दरिंदगी की सारी हदें पार कर दीं। मासूम की चीखें दीवारों में कैद रह गईं और जब वह लहूलुहान हालत में बाहर निकली तो पूरा मोहल्ला गुस्से से फट पड़ा।
वारदात की रात
कोतवाली थाना क्षेत्र के हरतीरथ दुल्लीगढ़ही मोहल्ले में बुधवार रात यह शर्मनाक घटना हुई। दलित परिवार की बच्ची बरामदे में सो रही थी। माँ का कुछ दिन पहले ही निधन हो चुका था और पिता व भाई-बहनों के साथ वह उसी घर में रहती थी। इसी मौके का फायदा उठाकर पड़ोसी हकीम महमूद अली ने बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया। दरवाजा बंद कर उसने बच्ची को धमकाया, दुष्कर्म किया और बेरहमी से पीटकर लहूलुहान कर दिया।
मासूम की चीखें और मोहल्ले का गुस्सा
कुछ देर बाद जब बच्ची किसी तरह कमरे से निकलकर रोते-बिलखते अपने घर पहुँची तो उसने जो आपबीती सुनाई, सुनकर परिजन और पड़ोसी सन्न रह गए। गुस्साई भीड़ तुरंत आरोपी के घर पहुँची। महमूद अली को भागते देख लोगों ने दौड़ाकर पकड़ लिया और गुस्से में जमकर पिटाई की। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस की कार्रवाई
पीड़िता की बड़ी बहन की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज किया। इंस्पेक्टर दया शंकर सिंह ने बताया कि आरोपी पर पॉक्सो एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है। मेडिकल परीक्षण के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
समाज पर सवाल
इस घटना ने पूरे मोहल्ले को सदमे और गुस्से में डाल दिया है। लोग कह रहे हैं – “इंसानियत इतनी नीचे कैसे गिर जाएगी, यह सोचा भी नहीं था।” दलित मासूम पर मुस्लिम पड़ोसी की दरिंदगी ने सामाजिक ताने-बाने को झकझोर दिया है। यह घटना एक बार फिर बच्चियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा करती है।
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला









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