श्री राम द्वारा धनुष भंजन की अत्यंत मनोहारी लीला का प्रस्तुतीकरण करते हुए कलाकारों ने दिखाया, जब कोई भी सीता स्वयंवर में आमंत्रित राजा महाराजा धनुष को हिला न सके तो राजा जनक चिंतित हुए और कटु शब्द कहें, क्रोधित लक्ष्मण को शांतकर गुरु आज्ञा से श्री राम ने धनुष का भंजन कर दिया। धनुष टूटते ही पुष्पवर्षा एवं जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। परशुराम संवाद का कलाकारों ने शानदार अभिनय किया।
विवाह महोत्सव की लीला के अंतर्गत सोमवार को भगवान श्रीराम का तिलकोत्सव मनाया गया और मंगलवार को राम विवाह होगा। कथा के अंतर्गत व्यासपीठ से पूज्य प्रकाश चंद्र महाराज ने शिव पार्वती विवाह के मनोहारी प्रसंग का वर्णन किया। शिव-पार्वती विवाह में भूत-प्रेतों को भी शामिल किया गया है, जो शिव की समता का दर्शन कराता है। शिव पार्वती साक्षात शक्ति और शक्तिमान है। लीला मात्र के लिए ये दोनों अलग रूपों में नजर आते हैं,
किंतु अर्ध नारीश्वर रूप में दोनों एक ही हैं। उन्होंने कहा,कि पार्वती जी हैं श्रद्धा, भगवान शंकर है विश्वास। दोनों का विवाह के माध्यम से मिलन ही मानो संकेत करता है कि जब तक साधक के हृदय में श्रद्धा रूपी पार्वती और विश्वास रूपी शिव का मिलन नहीं होगा तब तक उसके हृदय में श्री राम नाम की भक्ति का उदय नहीं हो सकता उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए आचार्य ने कहा कि जब जब पृथ्वी पर असुरों का अत्याचार बढ़ा, तब-तब ईश्वर ने किसी न किसी रूप में अवतार लेकर असुरों का संहार किया है।
जब धरा पर धर्म के स्थान पर अधर्म बढ़ने लगता है, तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर को आना ही पड़ता है। भगवान राम ने पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की और लोगों का कल्याण किया।इस अवसर पर प्रमुख रूप से महंत वैष्णव हरिशरण महाराज, पुरोहित कविंद्र, श्यामाचरण रस्तोगी, शत्रुघ्न सिंह, गुरुचरन लाल, हरिनारायण रस्तोगी, उमेश वर्मा, अनिरुद्ध भईया आदि रहे।
श्री राम बारात शोभायात्रा
पिहानी। माँ इच्छापूर्णी रामजानकी मंदिर में चल रहे श्री राम विवाह महोत्सव के अंतर्गत 25 नवंबर मंगलवार को श्री राम बारात प्रातः 10 बजे से नगर में निकाली जायेगी। सभी तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं, विवाह पंचमी पर प्रतिवर्ष निकलने वाली राम बारात को लेकर लोगों में भारी उत्साह रहता है।












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