बीएचयू के सामाजिक विज्ञान संकाय के इतिहास विभाग ने आयोजित किया राष्ट्रीय संगोष्ठी और पुरातन छात्र सम्मेलन।

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वाराणसी   जल का संरक्षण मानव सभ्यता के विकास काल से होता आ रहा है। मिश्र, रोम और विश्व की अनेक सभ्यताएं जल संसाधनों के पास विकसित हुई हैं। जो धार्मिक अनुष्ठान और जीवन शैली का हिस्सा रही हैं। यह बातें शुक्रवार को मुख्य अतिथि केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड, रांची के प्रो. जयप्रकाश लाल ने इतिहास विभाग, सामाजिक विज्ञान संकाय, बीएचयू द्वारा वैदिक विज्ञान केंद्र में आयोजित विश्व संस्कृति में जल संरक्षण : एक विमर्श और पुरातन छात्र सम्मेलन में कही।

लाल ने आगे कहा कि कुंए तालाब खत्म हो रहे हैं, संभावना है कि अगला विश्व युद्ध जल के लिए हो। उन्होंने आगे कहा कि प्राचीन काल में चट्टानों को काटकर तालाब बनाने, कर्मकांड, कृषि, यातायात आदि कार्यों के लिए जल संरक्षण के प्रमाण मिलते हैं।
विशिष्ट अतिथि कला इतिहास विभाग, दृश्य कला संकाय बीएचयू के प्रो. शांति स्वरूप सिन्हा ने कहा कि आदि काल से आधुनिक काल तक मानव विभिन्न प्रयोजनों से जल का संरक्षण करते आ रहा है। वास्तव में जल संरक्षण आधुनिक समय की मांग है। क्योंकि जल ही जीवन है। उन्होंने आगे कहा कि जल का पंचतत्व में विशेष महत्व है, यह जीव जगत का प्राण है।

विज्ञान की असीम प्रगति के बावजूद जल का निर्माण नहीं किया जा सकता। हमारी संस्कृति में सभी तीज त्योहारों का संबंध जल से है। यहीं कारण है कि भारत में नदियों को मां कहा जाता है।राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य वक्ता भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान, शिमला के पूर्व प्राचार्य प्रो. जयराम सिंह ने कहा कि राम, कृष्ण, ऋषि मुनियों का संबंध जल से रहा है।मानव सभ्यता और संस्कृतियों का नदियों या जल के समीप हुई हैं। मानव जाति के जीवन की शुरुआत और अंत जल से ही होता है। अतः अपने लिए और आगामी पीढ़ियों के लिए जल का संरक्षण किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. अशोक कुमार उपाध्याय, संकाय प्रमुख, सामाजिक विज्ञान संकाय, अतिथियों का स्वागत प्रो. घनश्याम, विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग और धन्यवाद ज्ञापन सहायक प्रोफेसर डॉ . सत्यपाल यादव ने और संचालन कार्यक्रम संयोजक सहायक प्रोफेसर अशोक कुमार सोनकर ने किया।कार्यक्रम के दूसरे सत्र में पुरातन छात्र सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें इतिहास विभाग के अनेक पुरातन छात्र शामिल हुए। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. पूनम पांडेय ने किया।इस अवसर पर कार्यक्रम सचिव डॉ. सीमा मिश्रा, डॉ. सत्यपाल यादव, शोधछात्र रिशु, डॉ. श्रेया पाठक, प्रो. ममता भटनागर, डॉ. अभय कुमार, डॉ. तारिक कलाम, डॉ. शशिकांत यादव, डॉ. सुरेंद्र सिंह, अमित राय, ब्रह्मानंद राय आदि लोग उपस्थित थे।

 

रिपोर्ट धनेश्वर साहनी

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