मां गंगा की लहरों पर आस्था की झिलमिलाहट ने नैसर्गिक सौंदर्य का वितान रच दिया। त्रिपुर राक्षस पर देवों की विजय के पर्व देव दीपावली ने जब आकार लिया तो धरती पर स्वर्ग की परिकल्पना साकार होती दिखी। मां गंगा के अर्धचंद्राकार घाटों से लगायत उनकी मचलती लहरों पर जब दिव्य आस्था के दीपों की झिलमिलाहट ने अपनी किरणों का जाल फेंका तो धरा से गगन तक, घाट से गंगधार तक नैसर्गिक सौंदर्य का वितान तन गया।
गंगोत्री सेवा समिति के तत्वावधान में देव दीपावली महोत्सव पर उपस्थित हजारों नागरिकों को गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया। गंगा और उनकी सहायक नदियों में गंदगी न फैलने की शपथ दिलाई । एक पेड़ मां के नाम लगाने और उसका संरक्षण करने की बात दुहराई।











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