संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज बनारस के बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों की भांति ही पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया।

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वाराणासी-   29 अक्टूबर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले बनारस के बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों की भांति ही पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया।वक्ताओ ने आज यहां बताया कि 10 अक्टूबर 2025 को हुई ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में उत्तर प्रदेश सहित छह प्रान्तों को चेतावनी दी गई है कि वे निजीकरण के तीन में से एक विकल्प को चुन लें अन्यथा उन्हें केन्द्र से मिलने वाली मदद बन्द कर दी जाएगी।

10 अक्टूबर को हुई ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की जिस मीटिंग में यह निर्णय लिया गया उसमें उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडु के ऊर्जा मंत्री सम्मिलित थे।ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की मीटिंग के मिनट्स पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि निजीकरण का कोई विकल्प स्वीकार नहीं किया जाएगा और निजीकरण के हर स्वरूप का पुरजोर विरोध किया जाएगा। ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की मीटिंग के जारी हुए मिनिट्स के अनुसार उत्तर प्रदेश सहित इन छह प्रान्तों के सामने पहला विकल्प यह होगा कि वे विद्युत वितरण निगमों की 51% इक्विटी निजी कंपनी को बेंच दे।

ऐसी स्थिति में सरकार अरक्षणीय कर्ज (अनसस्टेनेबल डेट) का भार खुद उठा लेगी और निजी कंपनी के हिस्से में आए कर्ज के लिए 0% ब्याज पर 50 साल में वापस की जाने वाली वित्तीय सहायता देगी ।दूसरे विकल्प के तौर पर इन राज्यों में विद्युत वितरण निगमों का प्रबंधन निजी क्षेत्र को दे दिया जाए। ऐसी स्थिति में सरकार अरक्षणीय कर्ज (अनसस्टेनेबल डेट) का भार खुद उठा लेगी और निजी क्षेत्र के प्रबंधन को 5 साल तक वित्तीय ग्रांट दी जाएगी।तीसरे विकल्प के तौर पर इन राज्यों की विद्युत वितरण कंपनियां की स्टॉक एक्सचेंज में सेबी में लिस्टिंग की जाए।

इसके लिए विद्युत वितरण कंपनियां की ग्रेडिंग कम से कम ‘ए’ होनी चाहिए। ऐसी विद्युत वितरण कंपनियों को जिनकी सेबी में लिस्टिंग हो जाएगी उन्हें भी भारत सरकार वित्तीय ग्रांट देगी।इन तीनों शर्तों को संघर्ष समिति ने निजीकरण के लिए ब्लैकमेल की संज्ञा दी है।संघर्ष समिति ने इस बात पर भी कड़ा एतराज जाहिर किया है कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के पदाधिकारियों को क्यों बुलाया गया था और वे किस हैसियत से इस मीटिंग में सम्मिलित थे जिसमें निजीकरण का इतना बड़ा निर्णय लिया गया ? संघर्ष समिति शुरू से ही इस बात का आरोप लगा रही है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन निजी घरानों और सरकार के बीच में निजीकरण के लिए बिचौलिए की भूमिका के लिए किया गया है।

ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन को सरकार की मीटिंग में बुलाना संघर्ष समिति के इस आरोप की पुष्टि करता है।संघर्ष समिति ने कहा है कि ग्रुप आफ मिनिस्टर्स की मीटिंग से स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश सहित कम से कम छह प्रान्तों में विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण की तैयारी है। संघर्ष समिति ने कहा की उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी पिछले 336 दिन से लगातार आंदोलन रत है। अन्य प्रांतों के बिजली कर्मियों के साथ विचार विमर्श कर निजीकरण के विरोध में संघर्ष की साझा रणनीति मुम्बई में 03 नवम्बर को तैयार की जाएगी।सभा को सर्वश्री ई0 मायाशंकर तिवारी ,ई0 एस0के0 सिंह,हेमन्त श्रीवास्तव, अरविंद कौशनन्दन, ब्रिज सोनकर, प्रवीण सिंह,रंजीत पटेल,योगेंद्र कुमार,अलका कुमारी,पूजा कुमारी,धनपाल सिंह,मनोज यादव,एस0के0 सरोज आदि ने संबोधित किया।

 

रिपोर्ट- विजयलक्ष्मी तिवारी

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