वाराणसी का रहस्यमयी ‘चंद्रकूप’: जहाँ झाँकते ही दिख जाती है मौत की झलक!

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वाराणसी-     काशी की तंग गलियों और आध्यात्मिक रहस्यों के बीच एक ऐसा स्थान छिपा है जो आस्था, रहस्य और भय—तीनों का संगम है। इसे चंद्रकूप कहा जाता है। स्थानीय लोग इसे “मौत बताने वाला कुआँ” भी कहते हैं। मान्यता है कि जो भी इस कुएं में झांकता है, उसे अपनी मृत्यु का संकेत मिल जाता है। सिद्धेश्वरी मोहल्ले में स्थित यह कुआँ साधारण नहीं, बल्कि पौराणिक काल की अमिट धरोहर माना जाता है। मान्यता है कि इसका निर्माण स्वयं चंद्रदेव ने करवाया था। पुराणों के अनुसार, चंद्रमा को उनके ससुर दक्ष प्रजापति ने श्राप दिया था कि वे क्षय रोग से पीड़ित हो जाएँगे। श्राप मुक्ति के लिए चंद्रदेव ने काशी में भगवान शिव की कठोर तपस्या की।

कहा जाता है कि उन्होंने चंद्रेश्वर लिंग की स्थापना की और लाखों वर्षों तक जलाभिषेक किया। प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें श्राप से मुक्ति दी और इस कुएं को दिव्य वरदान दिया — कि इसका जल अमृत समान होगा। इस जल को पीने से पाप नष्ट होते हैं और आत्मा शुद्ध होती है।

रहस्य: दिखे परछाईं तो लंबी उम्र, धुंधली हो तो मौत निकट!

स्थानीय ज्योतिषियों और श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति चंद्रकूप में झांकता है और अपनी परछाईं स्पष्ट दिखाई देती है, तो इसका अर्थ है कि उसकी आयु लंबी है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहेगी। लेकिन यदि परछाईं धुंधली दिखे या बिल्कुल न दिखे, तो यह माना जाता है कि मृत्यु छह महीनों के भीतर होने वाली है। यह भविष्यवाणी इतनी सटीक मानी जाती है कि बहुत से लोग डर के मारे इस कुएं में झांकने का साहस नहीं करते। मजबूत हृदय वाले ही इसमें झांकने की हिम्मत जुटा पाते हैं।

शिवभक्तों का तीर्थ और नवग्रह दोष निवारण स्थल

चंद्रकूप को शिवभक्तों का प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है। यहाँ पूजा करने के बाद कुएं का जल पीना शुभ माना जाता है। यह स्थान नवग्रह दोष निवारण के लिए भी प्रसिद्ध है। स्थानीय पुजारी बताते हैं कि “यह केवल मृत्यु का संकेत देने वाला कुआं नहीं, बल्कि यह जीवन के सत्य और कर्मों के परिणामों का दर्पण है।”

काशी का रहस्य, जो आज भी जिंदा है

वाराणसी आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक इसे जरूर देखने जाते हैं। किंवदंती हो या आस्था—चंद्रकूप आज भी लोगों के मन में रहस्य और श्रद्धा का संगम बना हुआ है।
कहा जाता है, “काशी में जो जन्म ले, वो जीना सीख जाता है… और जो चंद्रकूप में झाँक ले, वो मरने से पहले जीवन का अर्थ समझ जाता है।”

स्थान-

सिद्धेश्वरी मोहल्ला, वाराणसी
दर्शन का समय: प्रातः 6 बजे से रात्रि 9 बजे तक
प्रमुख आकर्षण: चंद्रेश्वर लिंग, चंद्रकूप, नवग्रह पूजा

चाहे इसे चमत्कार मानें या किंवदंती — चंद्रकूप वाराणसी की रहस्यमयी आत्मा का जीवंत प्रतीक है।
यह हमें याद दिलाता है कि जीवन क्षणभंगुर है, और आस्था ही सबसे बड़ा साहस।

 

 

रिपोर्ट -विजयलक्ष्मी तिवारी

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