कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, जिसे हम धनतेरस कहते हैं, इस बार देशभर में एक नए संदेश के साथ मनाई जा रही है। जहाँ परंपरागत रूप से लोग सोना-चाँदी, बर्तन या वाहन खरीदते हैं, वहीं इस वर्ष लोगों में “आरोग्य-धन” के प्रति भी नई जागरूकता दिखाई दे रही है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन धन्वंतरि भगवान समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। यही कारण है कि यह दिन सिर्फ भौतिक धन की नहीं, बल्कि “स्वास्थ्य” और “जीवन-ऊर्जा” की पूजा का भी प्रतीक माना जाता है।

इस बार कई मंदिरों और आरोग्य केंद्रों में ‘आरोग्य दीपदान’ की अनूठी परंपरा शुरू की गई है — जहाँ श्रद्धालु दीपक जलाकर न केवल माता लक्ष्मी और धन्वंतरि भगवान का आशीर्वाद ले रहे हैं, बल्कि बीमारों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की भी कामना कर रहे हैं।
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में इस वर्ष “सुवर्ण आरोग्य दीप” प्रज्ज्वलित किया गया, जिसमें नगर के चिकित्सक, वैद्य और आम लोग एक साथ शामिल हुए।
मंदिर के महंत ने कहा —
> “धनतेरस का अर्थ केवल धन-संपत्ति नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा की समृद्धि है। इस बार लोग सोने की नहीं, ‘स्नेह की रोशनी’ खरीद रहे हैं।”
शहर के कई परिवारों ने इस अवसर पर अस्पतालों में मरीजों को फल, दीपक और औषधियाँ बाँटकर ‘आरोग्य लक्ष्मी पूजा’ का संदेश दिया है।
इस धनतेरस, लोग यह मान रहे हैं कि
“सच्चा धन वही है जो दूसरों के जीवन में प्रकाश भर दे।”









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