अन्तर्राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में 350 विद्वानों ने रखा विचारः घर, विवाह और कृषि के मुद्दे पर पेश किया शोध-पत्र, बोले- शास्त्रों की रचना मानव कल्याण के लिए बना।।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग एवं इंदौर स्थित माँ शारदा ज्योतिषधाम अनुसंधान संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय ज्योतिष एवं वास्तु सम्मेलन का आज द्वितीय दिन भी अत्यंत विचारोत्तेजक और सारगर्भित रहा। इस अवसर पर देशभर से पधारे 350 से अधिक विद्वानों, आचार्यों एवं शोधार्थियों ने ज्योतिष एवं वास्तु के विविध पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
100 विद्वानों ने प्रस्तुत किया तकनीकी और समाजिक मुद्दे पर शोधपत्र
प्रो. विनय कुमार पाण्डेय ने सम्मेलन की उपलब्धियाँ साझा करते हुए बताया कि 100 से अधिक विद्वानों ने विभिन्न तकनीकी एवं सामाजिक विषयों पर प्रस्तुतियाँ दीं। अर्चना भारद्वाज ने वास्तु दोषों एवं उनके निवारण पर जानकारी दी, जबकि डिम्पल शर्मा ने ज्योतिष के नवीन अनुप्रयोगों पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक असंतोष को दूर करने हेतु सरल उपाय बताए।
मकान के मानचित्र पर प्रस्तुत किया शोध-पत्र
बैठक में विशेषज्ञों में कहा मकान में पूर्व और दक्षिण दिशा के अग्नि कोण में रसोईघर, पश्चिम में स्नानागार और धन संपत्ति के लिए उत्तर दिशा तय की गई है। वह कुबेर का स्थान है। उत्तर पूर्व के ईशान कोण पर पूजा घर होना चाहिए। शास्त्रों की रचना मानव कल्याण के लिए बना है। दक्षिण दिशा वास्तु के अनुसार शुभ नहीं होता लेकिन शोधन के बाद सुख शांति के साथ जिया जा सकता है।
उत्तर और पूर्व मुखी घर को सबसे सही माना जाता है। डॉ. तिवारी ने कहा कि बिना वास्तु शांति किए घर में प्रवेश नहीं कर सकते। शिलान्यास पूजन अग्नि कोण में होता है। इस काम को वेद पाठी और ब्राह्मणों से कराना चाहिए
रिपोर्ट धनेश्वर साहनी










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