वाराणसी वाराणसी के सबसे व्यस्ततम बाजारों में शुमार दालमंडी की संकरी सड़कों और जाम से जल्द ही राहत मिलने वाली है। दशकों से ट्रैफिक जाम और भीड़भाड़ से जूझ रहे इस क्षेत्र को अब नया रूप देने की कवायद शुरू हो गई है। जिला प्रशासन ने सड़क चौड़ीकरण परियोजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। सोमवार को प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया गया कि कुल 187 भवनों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं, और भवन स्वामियों को तीन दिनों के भीतर वैध अभिलेखों के साथ संपर्क करने का निर्देश दिया गया है।
17 मीटर चौड़ी होगी सड़क, धनराशि स्वीकृत
सोमवार को हुई प्रेस वार्ता में एडीएम सिटी आलोक कुमार, एडीएम फाइनेंस वंदिता श्रीवास्तव और पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता के.के. सिंह मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि दालमंडी की सड़क को 17 मीटर तक चौड़ा किया जाएगा, जिसके लिए धनराशि पहले ही स्वीकृत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट हर हाल में तय समय सीमा में पूरा किया जाएगा।
दो गुना मुआवजा और ऑन-साइट सहायता केंद्र
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता के.के. सिंह ने बताया कि भवन स्वामियों को सर्किल रेट से दो गुना मुआवजा दिया जाएगा। जो लोग अपने दस्तावेजों के साथ संपर्क करेंगे, उनकी मुआवजा प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाएगी।
उन्होंने कहा कि लोगों की शंकाओं को दूर करने के लिए दालमंडी में ही एक अस्थायी कार्यालय खोला गया है, जहां एई और जेई स्तर के अधिकारी रोजाना मौजूद रहेंगे।भवन स्वामियों से अपील की गई है कि वे खतौनी, नगर निगम का पीला कार्ड, बिजली बिल या अन्य दस्तावेज लेकर आएं ताकि दावे की जांच कर मुआवजा तय किया जा सके।
धार्मिक स्थल भी आए चौड़ीकरण की जद में
अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के दायरे में कुछ धार्मिक स्थल भी आए हैं। इन स्थलों के संबंध में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि निर्णय संवेदनशीलता और आपसी संवाद से लिया जाएगा।
विस्थापितों के पुनर्वास पर चर्चा के संकेत
एडीएम सिटी आलोक कुमार ने कहा कि अभी तक विस्थापितों की ओर से पुनर्वास की कोई औपचारिक मांग नहीं आई है। लेकिन यदि कोई आगे आता है तो प्रशासन बातचीत कर समाधान निकालने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास जमीन या भवन के कागजात नहीं हैं, वे भी बिजली बिल, आईडी कार्ड या नगर निगम कार्ड के आधार पर संपर्क कर सकते हैं।
लोग बोले – “मुआवजा कम, पुनर्वास चाहिए”
वहीं, स्थानीय भवन स्वामियों का कहना है कि मौजूदा मुआवजा शहर में दूसरी जगह मकान या दुकान खरीदने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने प्रशासन से पुनर्वास की बेहतर व्यवस्था की मांग की है ताकि व्यापार और जीवन दोनों प्रभावित न हों।
मुख्यमंत्री की निगरानी में प्रोजेक्ट
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस प्रोजेक्ट की प्रगति पर नजर रखे हुए हैं। यही कारण है कि जिला प्रशासन और नगर निगम की टीमें इसकी प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ा रही हैं।










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