UP के गाजीपुर के एक गांव में अकालु गोंड की बेटी की शादी थी। बारात द्वारपूजा के लिए निकली तो दूल्हे की गाड़ी द्वार तक नहीं जा पाई, क्योंकि गांव की गलियां इतनी तंग थीं कि चार पहिया वाहन के लिए पर्याप्त रास्ता नहीं था।

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UP के गाजीपुर के एक गांव में अकालु गोंड की बेटी की शादी थी। बारात द्वारपूजा के लिए निकली तो दूल्हे की गाड़ी द्वार तक नहीं जा पाई, क्योंकि गांव की गलियां इतनी तंग थीं कि चार पहिया वाहन के लिए पर्याप्त रास्ता नहीं था। ऐसे में दूल्हा पैदल जाने लगा।

यह देखकर गांव के एक युवा ने उस दूल्हे को अपने कंधे पर बिठा लिया और कंधे पर बैठाकर द्वार पूजा तक ले गया। लड़के का नाम “पीयूष राय” है, जो भूमिहार जाति से हैं, यानी “मोनूवादी”..

“घोड़ी पर दलित दूल्हे को नहीं बैठने दिया गया”, ऐसी खबरें पूरे देश में आग की तरह फैलती हैं। हालांकि, इनके कारण कुछ और होते हैं और 99% घटनाएं झूठी होती हैं। लेकिन इसी को आधार बनाकर आरक्षण भी मांगा जाता है।

लेकिन गाजीपुर वाली घटना के बारे में जिले के ही दलित एक्टिविस्ट नहीं जान पाते। और कुछ के कानों तक यह खबर पहुंचती भी है तो उनकी गंदी नीयत इसे दबा देती है, क्योंकि नफरत में लाभ है और आरक्षण जस्टिफाई होता है।

 

रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला

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