सफाई कर्मचारी संघ अध्यक्ष पर धमकी का आरोप, अखंड प्रताप के खिलाफ कार्रवाई की मांग

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गोरखपुर

जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब सभागार में सोमवार को उत्तर प्रदेश पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रमेश कुमार भारती ने प्रेसवार्ता कर खोराबार ब्लॉक के महीमाठ ग्राम सभा में तैनात सफाई कर्मचारी अखंड प्रताप सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। रमेश भारती ने कहा कि 30 जुलाई को कैंट थाना क्षेत्र में अखंड प्रताप सिंह ने कथित तौर पर उनके साथ भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया और गोली मारकर हत्या करने की धमकी दी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।

रमेश भारती ने कहा कि अखंड प्रताप सिंह ने उनके खिलाफ मंडलायुक्त को प्रार्थना पत्र देकर सफाई कर्मचारियों से धन उगाही करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस आरोप को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि यह अधिकारियों का ध्यान मूल मामले से भटकाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ धन उगाही का कोई प्रमाण है तो उसकी भी जांच करा ली जाए।

उन्हें किसी जांच से आपत्ति नहीं है, लेकिन आरोप लगाकर मूल मामले का रुख बदलने के बजाय पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।उन्होंने स्पष्ट किया कि अखंड प्रताप सिंह उनके कर्मचारी संगठन के कोई पदाधिकारी नहीं हैं। रमेश भारती ने कहा कि जिले के करीब 3100 सफाई कर्मचारियों ने मतदान के माध्यम से उन्हें निर्वाचित किया है और वह संगठन के अध्यक्ष के रूप में कर्मचारियों के हितों की आवाज उठाते हैं।

प्रेसवार्ता के दौरान रमेश भारती ने एक अन्य गंभीर बिंदु उठाते हुए कहा कि अखंड प्रताप सिंह के परिवार के कई सदस्य भी सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं। उनके अनुसार अखंड प्रताप सिंह की पत्नी, भाई, बहन और चाचा के भी सफाई कर्मचारी होने की जानकारी सामने आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कर्मचारियों के नियमित रूप से अपने तैनाती स्थल पर पहुंचकर कार्य करने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

रमेश भारती ने कहा कि इन आरोपों को सही या गलत मानने के बजाय विभाग को इसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। जांच में यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित कर्मचारी किस ग्राम पंचायत में तैनात हैं, उनकी वास्तविक उपस्थिति क्या है, वे नियमित रूप से सफाई कार्य करते हैं या नहीं और उनकी ड्यूटी के संबंध में विभागीय रिकॉर्ड क्या कहता है। यदि जांच में यह सामने आता है

कि कोई कर्मचारी बिना कार्य किए वेतन प्राप्त कर रहा है या उसके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति से काम कराया जा रहा है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी वेतन लेने वाले प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी है कि वह अपनी निर्धारित तैनाती पर उपस्थित होकर दायित्व का निर्वहन करे। इसलिए केवल किसी व्यक्ति विशेष के आरोप-प्रत्यारोप तक मामला सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विभाग को रिकॉर्ड के साथ मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए।

वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को लेकर आम जनता की ओर से भी समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ स्थानों पर तैनात सफाई कर्मचारी स्वयं काम करने के बजाय अपने स्थान पर दूसरे लोगों से सफाई कार्य कराते हैं। यह शिकायत कितनी सही है, इसका पता केवल विभागीय औचक निरीक्षण से ही चल सकता है। ऐसे में अधिकारियों से मांग है कि ग्राम पंचायत स्तर पर सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्य की जांच कराई जाए।

रमेश भारती ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत है तो उसकी जांच होनी चाहिए और यदि शिकायत गलत है तो उसे भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए धन उगाही के आरोपों की भी जांच हो और यदि कोई प्रमाण मिलता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। लेकिन यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो वास्तविक मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश करने वालों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अखंड प्रताप सिंह द्वारा मंडलायुक्त को दिए गए प्रार्थना पत्र और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के साथ-साथ 30 जुलाई की कथित धमकी की घटना की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है। दोनों मामलों में साक्ष्य और तथ्यों के आधार पर निर्णय होना चाहिए।

रमेश भारती ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी कर्मचारी विशेष को निशाना बनाना नहीं है। वह चाहते हैं कि सरकारी व्यवस्था पारदर्शी रहे और जो कर्मचारी अपने दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन कर रहे हैं, उनका सम्मान हो। वहीं यदि कोई कर्मचारी नियमों के विपरीत कार्य कर रहा है तो विभागीय जांच के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं जिला पंचायत राज अधिकारी सौम्य शील सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। पूरे प्रकरण से जुड़े तथ्यों की जांच कराई जा रही है।

जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।अब मामले में अखंड प्रताप सिंह के खिलाफ लगाए गए कथित धमकी के आरोप, उनके द्वारा मंडलायुक्त को दिए गए प्रार्थना पत्र और उनके परिवार के सदस्यों की कथित कार्यप्रणाली से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच अहम हो गई है।

जांच के दौरान संबंधित कर्मचारियों की उपस्थिति पंजिका, तैनाती स्थल, कार्य का रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति की जांच होने पर तस्वीर साफ हो सकती है।मामले का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो उसी आधार पर स्थिति स्पष्ट करना विभाग की जिम्मेदारी होगी।

 

रिपोर्ट: विजयलक्ष्मी तिवारी

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