सेठ एम.आर. जैपुरिया स्कूल्स, बनारस पड़ाव कैंपस के तत्वावधान में आज शनिवार, 8 अगस्त को भव्य सांस्कृतिक उत्सव ‘संस्कृति – Celebrating the Spirit of India’ का आयोजन किया गया ।
इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों में ‘विविधता में एकता’ और राष्ट्रीय धरोहरों के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ करना था ।
इस वर्ष कार्यक्रम का मुख्य विषय: “एक राष्ट्र, अनेक संस्कृतियाँ, अनगिनत परंपराएँ, असीम गौरव” रखा गया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के वरिष्ठ अतिथिवृन्द के स्वागत के साथ किया गया तत्पश्चात विद्यालय के गणमान्य अतिथिगण माँ शारदा के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम को विधिवत आरम्भ करने की अनुमति प्रदान की गई और औपचारिक घोषणा के बाद अतिथिगण ‘फेयर विजिट’ किए जहाँ छात्र-छात्राओं द्वारा निर्मित नयनाभिराम कला और सांस्कृतिक स्टॉल्स का अवलोकन किया गया |

इसी क्रम में गीत व नृत्य का सांस्कृतिक संगम: देश के विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं का प्रदर्शन करते हुए छात्र राजस्थानी, लावणी (महाराष्ट्र), गरबा (गुजरात), कश्मीरी, गोअन, बिहू (असम) और पंजाबी भांगड़ा नृत्यों की ऊर्जावान प्रस्तुतिया देकर दर्शकदीर्घा भावविभोर कर दिया, वही बंगाली गीत, मिथिला लोक गीत तथा काशी की माटी से जुड़े ‘कजरी’ गीतों की मधुर धुनें जब सभागार में गुंजित हुईं तो समस्त सभागार उन तरानों झूम उठा ।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सभी विद्यार्थियों द्वारा “मिले सुर मेरा तुम्हारा” की संगीतमय सामूहिक प्रस्तुति रही । संस्कृति के रंग में रंगा विविध प्रान्तों का स्टॉल अपने अपने प्रान्त का स्वाद,वेशभूषा और समृद्ध संस्कृति की गौरव गाथा को जीवंत किये हुए था |
विद्यार्थियों द्वारा निर्मित पेंटिंग्स, पारंपरिक हस्तशिल्प प्रदर्शनी और इंडिया गेट, कुतुब मीनार व ताजमहल जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों की जीवंत झांकियां भी प्रस्तुत की गई । उत्सव के दौरान संपूर्ण परिसर भारतीय कला और परंपराओं के रंगों में सराबोर दिखा |

अध्यक्षीय उद्बोधन में दीपक बजाज जी ने कहा कि – आप जितना मानते हैं उससे कहीं अधिक साहसी, जितना दिखते हैं उससे कहीं अधिक शक्तिशाली और जितना सोचते हैं उससे कहीं अधिक बुद्धिमान हैं। उद्यमिता, नेतृत्व या किसी भी अन्य क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने की आकांक्षा रखने वाले बच्चों के लिए चुनौतियों को स्वीकार करना और असफलताओं से सीखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विकास की मानसिकता विकसित करके और कठिनाइयों को विकास के अवसरों के रूप में देखकर, वे लचीलापन विकसित कर सकते हैं और बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कर सकते हैं। विद्यालय के प्रबंध निदेशक मनोज बजाज ने अपने उद्बोधन में कहा कि “‘संस्कृति’ केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विचार को आत्मसात कराने का सशक्त माध्यम है। इससे छात्रों में नैतिक मूल्यों और आत्मविश्वास का विकास होता है।” विद्यालय के प्रधानाचार्य ने सभी का स्वागत करते हुए सभी को अपने प्रेरणास्पद विचारो से अभिसिओंचित किया |
इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष दीपक बजाज ,प्रबंध निदेशक मनोज बजाज , विद्यालय के कार्यकारी निदेशक श्यामसुंदर बजाज ,निदेशक आयुष्मान बजाज ,गौरांग बजाज ,गवेन्द्र बजाज ,निदेशिका पूजा बजाज , प्रधानाचार्य बिनोद कुमार दास एवं समस्त शिक्षक वृंद व बच्चों की गरिमापूर्ण उपस्थिती रही I
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन मिडील विंग संयोजिका सिमरनप्रीत कौर ने किया एवं संचालन सिमरित कौर व तनुप्रिया पॉल ने किया |










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