वाराणसी। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकार और उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर वाराणसी में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लालपुर-पांडेयपुर क्षेत्र में रास्ता मांगने को लेकर हुए विवाद ने उस समय भयावह रूप ले लिया। जब आरोप है। कि मनबढ़ युवकों ने पत्रकार के परिवार पर हमला कर दिया। घटना में अनुराग राय के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं और वह लहूलुहान हो गए। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से बाद में BHU ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया।
जानकारी के अनुसार, 31 जुलाई की रात प्रियंका राय पत्नी अनुराग राय, निवासी नई बस्ती, अपने पति के साथ कार से गाजीपुर से वाराणसी लौट रही थीं। आरोप है। कि यादव आटा चक्की और राज पब्लिक स्कूल के पास कुछ लोग सड़क पर रास्ता रोके खड़े थे। रास्ता देने के लिए कहने पर विवाद बढ़ गया।
पीड़ित पक्ष का आरोप है। कि विवाद बढ़ने के बाद आरोपितों ने अनुराग राय को कार से बाहर खींच लिया और डमरू वाली ईंट से उनके सिर पर हमला कर दिया। बीच-बचाव करने पहुंचीं प्रियंका राय के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप है। हमले में अनुराग के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं।
घटना के बाद घायल अनुराग को तत्काल पं. दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें BHU ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया।
पीड़िता प्रियंका राय की तहरीर के आधार पर लालपुर थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच एवं अग्रिम कार्रवाई शुरू कर दी है। पीड़ित पक्ष ने आरोपितों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
‘अस्पताल तक पीछा करने’ का भी आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है। कि हमलावरों का मनोबल इतना बढ़ा हुआ था कि घटना के बाद भी उन्होंने अस्पताल तक पीछा किया। परिवार की ओर से घटना से संबंधित वीडियो साक्ष्य होने की बात कही गई है। पीड़ित पक्ष का कहना है। कि आवश्यकता पड़ने पर ये साक्ष्य पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।
वरिष्ठ पत्रकार पिता ने उठाई गिरफ्तारी की मांग
घटना की जानकारी मिलने के बाद अनुराग राय के पिता एवं वरिष्ठ पत्रकार अरुण सिंह ने पुलिस से आरोपितों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने कहा कि पत्रकार और उनके परिवार के साथ इस प्रकार की बर्बरता सभ्य समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
घटना की खबर सुनकर मां हुईं बेहोश
बताया गया कि अनुराग राय की मां पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। बेटे पर हुए हमले की जानकारी मिलते ही वह सदमे में बेहोश हो गईं। इस घटना ने एक बेहद गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। जब पुलिस विभाग से जुड़े परिवार भी खुद को सुरक्षित महसूस न करें, तो आम नागरिक अपनी सुरक्षा को लेकर किस पर भरोसा करे।
पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
यह मामला केवल एक परिवार पर हुए हमले तक सीमित नहीं है। यह पत्रकारों और उनके परिवारों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न भी है। पत्रकार समाज की आवाज बनकर जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाते हैं। ऐसे में यदि किसी पत्रकार के परिवार पर खुलेआम हमला होने के आरोप लगते हैं। तो यह कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती है।
अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। पीड़ित परिवार को न्याय, आरोपितों की निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने पर कठोर कानूनी कार्रवाई—यही इस पूरे प्रकरण में कानून के राज का सबसे बड़ा संदेश होगा।
रिपोर्ट जगदीश शुक्ला










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