जौनपुर, मड़ियाहूं
तहसील अंतर्गत ग्राम महमदपुर पिपरा से मानवता को झकझोर देने वाला एक अत्यंत संवेदनशील मामला सामने आया है। एक भूमिहीन, गरीब और असहाय महिला वंदना शर्मा ने गांव के वर्तमान प्रधान एवं अपने कुछ पट्टीदारों पर लगातार प्रताड़ित करने तथा उन्हें उजाड़ने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता ने अपनी जान-माल और आशियाने की सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी जौनपुर से न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़िता के अनुसार, उनके पास रहने के लिए अपनी कोई निजी भूमि नहीं है। वह आराजी संख्या-424 के आवंटित भू-भाग पर एक छोटे से छप्परनुमा झोपड़ी में अपने परिवार के साथ किसी प्रकार जीवन-यापन कर रही हैं। उनका आरोप है। कि गांव के प्रधान और कुछ पट्टीदार उन्हें उस स्थान से जबरन हटाना चाहते हैं। तथा आए दिन उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हुए उजाड़ देने की धमकी देते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है। कि यदि एक भूमिहीन महिला से उसके सिर पर छत का यह आखिरी सहारा भी छीन लिया गया, तो आखिर वह अपने परिवार के साथ कहां जाएगी। क्या गरीबी किसी व्यक्ति का सबसे बड़ा अपराध बन चुकी है। क्या एक असहाय महिला को भय और आतंक के साये में जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
पीड़िता का कहना है। कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण पूरा परिवार भयभीत है। बच्चे, महिलाएं और परिवार के अन्य सदस्य हर समय किसी अनहोनी की आशंका से सहमे हुए हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है। कि उन्हें तत्काल सुरक्षा प्रदान की जाए तथा मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
यह मामला केवल एक परिवार के आशियाने का नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त प्रत्येक नागरिक के सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार का भी है। यदि किसी भूमिहीन महिला को डराकर, धमकाकर अथवा जबरन बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है। तो यह एक अत्यंत गंभीर विषय है। जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
पीड़िता ने जिलाधिकारी जौनपुर को प्रार्थना-पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। अब जनपद प्रशासन की ओर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं। कि आखिर इस गरीब और असहाय परिवार को न्याय कब और कैसे मिलेगा।
प्रशासन से प्रमुख मांगें
पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
मामले की तत्काल राजस्व एवं पुलिस विभाग से संयुक्त निष्पक्ष जांच कराई जाए।
यदि किसी प्रकार की धमकी या उत्पीड़न की पुष्टि होती है। तो दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाए।
भूमिहीन महिला के आवास एवं पुनर्वास संबंधी अधिकारों का परीक्षण कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
एक गरीब की झोपड़ी उजड़ने से पहले यदि प्रशासन जाग जाए, तो शायद किसी की जिंदगी बिखरने से बच सकती है। न्याय केवल अदालतों में नहीं, बल्कि प्रशासन की संवेदनशीलता में भी दिखाई देता है।










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