चन्दौली पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय), चंदौली
चंदौली जनपद के अलीनगर थाना क्षेत्र स्थित गोरईया गांव में भूमि विवाद का मामला एक बार फिर चर्चा में है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों द्वारा उनकी पुश्तैनी भूमि पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। विरोध करने पर मारपीट, धमकी और आगजनी जैसी घटनाएं भी हुईं, लेकिन शिकायतों के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक सहित प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित पक्ष की ओर से अधिवक्ता चन्दन कुमार सिंह ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि ग्राम गोरईया स्थित आराजी संख्या-111 पर उनके परिवार का वर्षों पुराना कब्जा है। उनका दावा है कि यह भूमि वर्ष 1976 में पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से प्राप्त हुई थी और इस संबंध में सिविल जज (सीनियर डिवीजन), चंदौली की अदालत में वाद संख्या 164/2015 विचाराधीन है, जिसमें उनके पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा (स्टे ऑर्डर) भी पारित है।
आरोप है कि इसके बावजूद गांव के कुछ लोग लगातार उक्त भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार कई बार थाना अलीनगर और थाना दिवस में शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि चकबंदी विभाग के अधिकारी द्वारा अवैध कब्जे की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट भी भेजी गई, लेकिन कब्जा हटाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।
पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि 23 मई 2026 को विवादित भूमि पर गन्ने की खोई (खुज्जा) रखकर उसमें आग लगा दी गई, जिससे उनका कच्चा मकान, मड़ई और दो अमरूद के पेड़ जलकर क्षतिग्रस्त हो गए। इस घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई थी। अब फिर उसी स्थान पर गन्ने की खोई रखी जा रही है, जिससे उन्हें दोबारा आगजनी और कब्जे की आशंका सता रही है।
इसी मामले में पीड़ित माखन गुप्ता ने भी आरोप लगाया कि 17 जुलाई को कुछ लोगों ने उनकी जमीन की बाउंड्री तोड़कर कब्जा करने का प्रयास किया। विरोध करने पर विवाद की स्थिति बन गई। सूचना पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य रुकवा दिया, लेकिन आरोपितों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
अधिवक्ता चन्दन कुमार सिंह का आरोप है कि उनकी भूमि पर गिट्टी गिराकर कब्जा करने की कोशिश की गई। विरोध करने पर उनकी माता के साथ मारपीट की गई, जिससे उनके पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया। उनका कहना है कि पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर संयुक्त टीम मौके पर पहुंची, लेकिन न तो भूमि की पैमाइश कराई गई और न ही कथित अवैध कब्जा हटाया गया।
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। उन्होंने मांग की है कि राजस्व विभाग, चकबंदी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा मौके पर निष्पक्ष जांच कराकर भूमि की पैमाइश कराई जाए। यदि अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाया जाए तथा मारपीट, आगजनी और कब्जे के प्रयास के आरोपितों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी रहे और किसी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो।
नोट:
यह समाचार पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों, उपलब्ध दस्तावेजों और दिए गए बयानों पर आधारित है। मामले में प्रशासन या दूसरे पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।










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