वाराणसी
जब समाज का एक वर्ग जन्मदिन को केवल औपचारिक उत्सव तक सीमित रखता है। तब मानवाधिकार सहयोग संघ (एडीसीए) परिवार ने सेवा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व की एक ऐसी मिसाल पेश की है। जिसने मानवता को नई दिशा देने का कार्य किया है।
वाराणसी के विद्या भारती विद्यालय टिकरी स्थित स्वामी वितरागानन्द सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में 55 जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को निःशुल्क रेनकोट वितरित कर यह संदेश दिया गया कि सच्चा उत्सव वही है। जो किसी के जीवन में मुस्कान बनकर उतरे।
यह पुनीत आयोजन युवा प्रकोष्ठ वाराणसी के महामंत्री अर्जुन राय द्वारा उनकी धर्मपत्नी रिया सिंह के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर किया गया। वर्षा ऋतु के आगमन पर बच्चों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोजित इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि मानवाधिकार सहयोग संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और सामाजिक चेतना का सशक्त आंदोलन है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मानवाधिकार सहयोग संघ (एडीसीए) के राष्ट्रीय मंत्री बसंत लाल सैनी एवं विशिष्ट अतिथि वाराणसी महानगर महामंत्री प्रियव्रत मिश्रा रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, आरती एवं वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और प्रेरणादायी बना दिया।
अपने ओजस्वी संबोधन में राष्ट्रीय मंत्री बसंत लाल सैनी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है। कि हम अपनी भारतीय संस्कृति और परंपराओं को पुनः आत्मसात करें। उन्होंने कहा, “मोमबत्तियां बुझाकर और गुब्बारे फोड़कर जन्मदिन मनाना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने शुभ अवसरों पर जरूरतमंद बच्चों को कॉपी, किताब, स्कूल बैग, जूते अथवा रेनकोट वितरित करे, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई क्रांति लाई जा सकती है।”
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक-दो मिनट की देरी के कारण विद्यार्थियों को परीक्षा से वंचित कर देना उनके पूरे वर्ष के परिश्रम के साथ अन्याय है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे विद्यार्थियों के लिए 15 मिनट का ग्रेस पीरियड निर्धारित कर अलग कक्ष में परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए, ताकि किसी बच्चे का भविष्य केवल कुछ मिनटों की देरी से प्रभावित न हो।
विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संजय कुमार सिंह ने मानवाधिकार सहयोग संघ (एडीसीए) परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के मन में सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीज बोते हैं। वहीं विद्यालय परिवार ने इस आयोजन को शिक्षा और मानवता के संगम का अद्भुत उदाहरण बताया।
इस अवसर पर मानवाधिकार सहयोग संघ (एडीसीए) उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा को उनके सामाजिक, संगठनात्मक एवं जनसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए माल्यार्पण, अंगवस्त्र, अभिनंदन पत्र एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन तमाम कार्यकर्ताओं की मेहनत और समर्पण का प्रतीक है, जो संगठन को जन-जन तक पहुंचाने में निरंतर जुटे हुए हैं।
कार्यक्रम में लक्ष्मी अग्रहरि (महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष, वाराणसी), किरण पांडे (उपाध्यक्ष), नीलम श्रीवास्तव (प्रभारी), सुनीता विश्वकर्मा (सह प्रभारी), पूजा गुप्ता (महामंत्री), मणि सिंह, पूनम सिंह, प्रधानाचार्या शशि राय, पलक, राजेश गौतम (जिला उपाध्यक्ष, नेशनल मीडिया प्रेस क्लब), वरिष्ठ पत्रकार जगदीश प्रसाद शुक्ला सहित विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
मानवाधिकार सहयोग संघ (एडीसीए) परिवार का यह प्रयास केवल रेनकोट वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह संदेश देकर गया कि यदि समाज का प्रत्येक सक्षम व्यक्ति अपने जीवन के विशेष अवसरों को जनसेवा से जोड़ ले, तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।
वाराणसी की धरती से उठी यह पहल पूरे प्रदेश और देश के लिए प्रेरणा बन चुकी है। मानवाधिकार सहयोग संघ (एडीसीए) ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है। कि “जहां सेवा है। वहीं सच्चा सम्मान है। जहां संस्कार हैं। वहीं राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य है।









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