खरीफ फसलों को कीट व रोगों से बचाने के लिए कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

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चन्दौली

जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने बताया कि खरीफ के अन्य फसलों की बुवाई तथा धान की रोपाई करना प्रारंभ कर दिया है।बदलते मौसम को देखते हुए कृषि निदेशालय लखनऊ द्वारा खरीफ के फसलों पर लगने वाले कीट -रोग से बचाव के लिए सुझाव दिया है

जिसके क्रम में किसान भाइयों के लिए उपयोगी फसलवार एडवाइजरी जारी की है। किसान भाईयो को मेरा सुझाव होगा कि आप अपने फसलों की निगरानी करते रहें ताकि आप उसका सही उपचार कर सकें।

जनपद में इस समय धान, अरहर, मक्का, ज्वार, बाजार, उर्द, मूँग एवं कुछ सब्जियों की खेती की जा रही है। समुचित निगरानी एवं वैज्ञानिक सुझाव को दृष्टिगत रखते हूए इन फसलों में लगने वाले कीट/रोग के प्रबंधन की लागत कम की जा सकती है।

फसलवार बचाव के उपाय-

1. धान-

खरपतवार
रोपाई वाले धान की फसल में उगने वाले खरपतवारों से बचने के लिए रोपाई के बाद पेनोक्ससुलम 21.7% एस० सी० 100 मिली० मात्रा बुवाई के 2-3 दिन के अंदर 500 लीटर पानी में घोल बनाकर या बिसपयारीबैक सोडियम 10% एस० सी० की 200 मिली० मात्रा 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

धान की सीधी बुवाई की दशा में बेनसलफ्यूरान 60% डी० एफ० 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर बुवाई के 2-3 दिन में 300 लीटर पानी में या ऑक्सिफ्लोरफेन 23.5% ई० सी० 800 मिली० 500 लीटर पानी में घोल प्रयोग करना चाहिए।

तना बेधक-
तना बेधक से बचाव हेतु फेरोमोन ट्रैप 4-5 प्रति एकड़ की दर से निगरानी के लिए प्रयोग करना चाहिए | पौधों पर इसके अंडसमूह दिखाई पड़ने पर ट्राईकोग्रामा जापोनिकम या ट्राईकोग्रामा किलोनिस 1 लाख हे० की दर से प्रयोग करना चाहिए । इसके रासायनिक नियंत्रण हेतु बाईफेनथ्रिन 10 प्रतिशत ई०सी० की 500 मिली मात्रा अथवा क्लोरेनट्रानिलीप्रोल 18.5 एस०सी० की 150 मिली मात्रा 500 ली० पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी० की 18 किग्रा० मात्रा को प्रति हे० की दर से 3-5 सेमी स्थिर पानी में बिखेर कर प्रयोग करें।

पत्ती लपेटक-
इस कीट की निगरानी हेतु फेरोमोन ट्रैप 4-5 प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करना चाहिए | इसके रासायनिक नियंत्रण हेतु बाईफेनथ्रिन 10 प्रतिशत ई०सी० की 500 मिली मात्रा अथवा क्लोरेनट्रानिलीप्रोल 18.5 एस०सी० की 150 मिली मात्रा 500 ली० पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।

फुदका
धान में प्रायः दुग्धावस्था में हरा, भूरा एवं सफेद पीठ वाले फुदके का प्रकोप देखा जाता है। इसके नियंत्रण हेतु बुप्रोफेजिन 25 प्रतिशत एस०सी० 800 मिली अथवा बेंजीपायरीमोक्सान 10 प्रतिशत एस०सी० 900 मिली प्रति हे० की दर से 500 ली० पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए अथवा एजाडिरेक्टिन 0.15 प्रतिशत ई०सी० 2.5 ली० प्रति हे० 500-600 ली० पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए |

जीवाणु झुनसा एवं जीवणुधारी रोग-

जीवाणु झुलसा एवं जीवणुधारी रोग के नियंत्रण हेतुः स्यूडोमोनास फ्लोरीसेन्स 1.5 प्रतिशत डब्लू०पी० की 2.5 किग्रा० मात्रा प्रति हे० की दर से बुवाई से पूर्व बुरकाव करना चाहिए | स्ट्रेप्टोमाईसिन सल्फेट 90 प्रतिशत टेट्रासाईक्लिंन हाइड्रोक्लोराइड 10 प्रतिशत की 15 ग्राम मात्रा को 500 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यू०पी० के साथ मिलाकर 500-700 ली० पानी में घोलकर प्रति हे० की दर से छिडकाव करना चाहिए |

2. मक्का

तना बेधक कीट-
इस कीट का 10 प्रतिशत मृत गोभ (आर्थिक क्षति स्तर) दिखाई पड़ने पर डाईमिथोएट 30 प्रतिशत ई०सी० की 660 मिली० मात्रा प्रति हे० 700 ली० पानी में घोलकर अथवा नोवालुरोन 05.25 प्रतिशत इमामेक्टिन बेन्जोएट 0.9 प्रतिशत ई०सी० की 1.5 ली० मात्रा प्रति हे० 500 ली० पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए ।

फॉन आर्मी वर्म-
इस कीट से बचाव हेतु 20-25 पक्षी आश्रय तथा 3-4 की संख्या में प्रकाश प्रपंच स्थापित करने चाहिए | 35-40 फेरोमोन ट्रैप प्रति हे० लगाकर भी इस कीट का प्रबंधन किया जा सकता है। कीट के रासायनिक नियंत्रण हेतु ब्रोफ्लोनिलाइड 20 प्रतिशत एस०सी० की 125 मिली० मात्रा अथवा क्लोरेनट्रानिलीप्रोल 47.85 प्रतिशत एस०सी० की 75 मिली० मात्रा प्रति हे० की दर से 500 ली० पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए ।

3. अरहर / उर्द/मूंग-

फसल को मृदा जनित रोगों से बचाने हेतु ट्राईकोडर्मा 2% डब्ल्यू०पी० एवं ब्युवेरिया बेसिअना 1% डब्ल्यू०पी० की 2.5 किग्रा मात्रा को प्रति हे० 60-75 किग्रा गोबर की खाद में मिलाकर 8-10 दिन छाया में रखने के उपरांत अंतिम जुताई के समय भूमि में मिला देने से कमशः मृदा जनित रोगों एवं दीमक, सफेद गिडार सूत्रकृमि, कटवर्म एवं जड़ की मुंडी आदि कीटों से बचाव किया जा सकता है।

अरहर में बीजशोधन हेतु एक किग्रा बीज को कार्बोक्सिन 37.5%+थिरम 37.5% डब्ल्यू०एस० अथवा 4 ग्राम ट्राईकोडर्मा +1 ग्राम कार्बोक्सिन से उपचारित कर बोना चाहिए। अन्य दलहनी फसलों के बीजों को बुवाई से पहले 4 ग्राम ट्राईकोडर्मा पति किग्रा बीज की दर से शोधित कर बुवाई करने से बीज जनित रोगों का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।

4-सब्जी वर्गीय-
बैगन का फल एवं तना बेधक इस कीट के नियंत्रण हेतु ब्रोफ्लोनिलाइड 20 प्रतिशत एस०सी० की 125 मिली० मात्रा 500 ली० पानी में घोलकर अथवा कार्बोसल्फान 25% ई०सी० की 1.2 ली० मात्रा को 500 ली० पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए |

मिर्च में थ्रिप्स एवं फल बेधक के नियंत्रण हेतु सायंट्रानिलीप्रोल 10.26% ओ०डी० की 600 मिली मात्रा को 500 ली० पानी में घोलकर अथवा एमामेक्टिन बेंजोएट 05% एस०जी० की 200 मिली मात्रा को 500 ली० पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए ।

मोबाईल होगी साथी :

भारत सरकार, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के नवीनतम (AI) तकनीकियों का उपयोग करते हुए देश में एक प्रौधोगिकी आधारित राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली एप्प निर्मित है जिसके माध्यम से किसान भाई स्वयं कीट/रोग की पहचान कर सकेंगे और इच्छित सूचना भेजने पर प्रबंधन के उपाय भी सुझाता है।

 

रिपोर्ट – अलीम हाशमी

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