गाजीपुर में फर्जीवाड़े पर DIG का बड़ा ‘सर्जिकल स्ट्राइक’! जांच में खेल करने वाले दो दरोगा सस्पेंड, 7 फर्मों की जांच फिर से शुरू

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वाराणसी/गाजीपुर

सरकारी निविदा में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के मामले में जांच में लापरवाही और कथित लीपापोती करने वाले दो उपनिरीक्षकों पर वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

यह मामला 25 फरवरी 2025 को गाजीपुर के कोतवाली थाने में दर्ज हुआ था। आरोप था कि ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM)’ पोर्टल के माध्यम से तकनीकी अनुदेशकों की नियुक्ति से जुड़ी निविदा प्रक्रिया में सात निजी फर्मों ने फर्जी वित्तीय दस्तावेज (डीडी, एफडीआर और ईएमडी) प्रस्तुत किए थे।

डीआईजी वैभव कृष्ण द्वारा की गई समीक्षा में सामने आया कि विवेचकों ने मामले के गंभीर तथ्यों की समुचित जांच नहीं की, बल्कि बिना ठोस आधार के सातों संदिग्ध फर्मों को जांच से बाहर रखने का प्रयास किया। इतना ही नहीं, अपराध के पर्याप्त संकेत मिलने के बावजूद जल्दबाजी में मामले में अंतिम रिपोर्ट (फाइनल रिपोर्ट) लगाने की कोशिश भी की गई।

इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए उपनिरीक्षक रोहित कुमार और जितेंद्र कुमार उपाध्याय (थाना कोतवाली, गाजीपुर) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

साथ ही, मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए विवेचना क्षेत्राधिकारी (नगर) को स्थानांतरित कर दी गई है। डीआईजी ने 30 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

डीआईजी वैभव कृष्ण ने स्पष्ट संदेश दिया है कि संवेदनशील मामलों में लापरवाही, पक्षपात या लीपापोती किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भविष्य में भी ऐसे मामलों में दोषी अधिकारियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

 

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

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