होटल डी पेरिस डांडिया फर्जीवाड़ा कांड: पवन सिंह के नाम पर लाखों की ठगी, अब 5 अक्टूबर का कार्यक्रम भी रद्द

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वाराणसी   शारदीय नवरात्रि पर आयोजित होने वाले डांडिया उत्सव को लेकर वाराणसी का होटल डि पेरिस लगातार विवादों में घिरता जा रहा है। पहले 30 सितंबर को भोजपुरी स्टार पवन सिंह के नाम पर आयोजित डांडिया कार्यक्रम रद्द हुआ, और अब 5 अक्टूबर को होने वाला दूसरा आयोजन भी रद्द कर दिया गया है। इस पूरे मामले ने न केवल आयोजकों की पोल खोली है, बल्कि हजारों टिकट धारकों को ठगी का शिकार भी बना दिया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

30 सितंबर को डांडिया नाइट का आयोजन करने का दावा इवेंट प्लानर अनिल साहू और एक कथित महिला व्यापार मंडल अध्यक्ष ने किया। कार्यक्रम का बड़ा आकर्षण भोजपुरी गायक पवन सिंह को बताया गया। इसके नाम पर 500 और 1000 रुपये के हजारों टिकट बेचे गए, जिससे आयोजकों की जेब में लाखों रुपये पहुंचे।

लेकिन यह खेल तब खुला जब आगरा के सोशल एक्टिविस्ट अमन गुप्ता ने पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल को लिखित शिकायत दी। उन्होंने कहा कि पवन सिंह जैसे बड़े कलाकार के नाम पर हजारों की भीड़ इकट्ठा हो सकती है, जिससे अफरा-तफरी मच सकती है। साथ ही आरोप लगाया कि यह आयोजन केवल धर्म और संस्कृति की आड़ में टिकट बेचकर लाखों रुपये कमाने का जरिया है, जिसमें न तो जिला मनोरंजन अधिकारी और न ही जीएसटी विभाग की कोई अनुमति ली गई थी।

होटल ने किया किनारा, आयोजकों पर केस दर्ज

जब कार्यक्रम रद्द होने की सूचना मिली तो टिकट धारकों ने होटल डि पेरिस के बाहर जमकर हंगामा किया। किसी तरह कैंट पुलिस ने स्थिति को संभाला, मगर बाद में इवेंट प्लानर अनिल साहू और महिला पदाधिकारी सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

होटल प्रबंधन ने भी अपनी सफाई में आयोजकों पर ही ठगी का ठीकरा फोड़ा। होटल मैनेजर राकेश श्रीवास्तव ने कैंट थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपी। वहीं, 5 अक्टूबर को होने वाले डांडिया कार्यक्रम की आयोजक बताई जा रही महिला पदाधिकारी ने भी कार्यक्रम से पल्ला झाड़ लिया।

लाखों टिकट बिके, जनता परेशान

टिकट खरीद चुके लोगों का कहना है कि उन्होंने पूरे परिवार के साथ उत्सव का आनंद लेने के लिए टिकट लिए थे, लेकिन बार-बार कार्यक्रम रद्द होने से उनका पैसा फंस गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उन्हें उनका पैसा वापस मिलेगा या नहीं।

परंपरा बनाम बाजारीकरण

नवरात्र जैसे पावन पर्व पर गरबा और डांडिया कार्यक्रम उत्साह का हिस्सा होते हैं, लेकिन इस घटना ने एक कड़वा सच सामने ला दिया है। धार्मिक आस्था के नाम पर ऐसे आयोजनों को ठगी और बिजनेस का जरिया बनाना सीधे-सीधे सनातन परंपरा का अपमान है। अब प्रशासन और आम जनता दोनों के सामने यह सवाल खड़ा है कि धर्म और संस्कृति की आड़ में हो रहे ऐसे फर्जीवाड़ों पर नकेल कब कसी जाएगी?फिलहाल, 5 अक्टूबर का आयोजन भी रद्द हो गया है और हजारों टिकट धारक अपनी रकम वसूलने के इंतजार में हैं।

 

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

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