हिंदुत्व कैसे मुस्कुराता है!

Picture of voiceofshaurya@gmail.com

voiceofshaurya@gmail.com

FOLLOW US:

Share

अयोध्या के रंधू हरिजन की पुत्री का विवाह था, रंधू की आर्थिक स्थिति शोचनीय थी। आजकल विवाह व्यक्तिगत मामला माना जाता है नहीं तो एक समय ऐसा
था कि बेटियां साझी हुआ करती थीं, गांव की बेटी के ब्याह में सभी लोग कुछ न कुछ योगदान देते थे जिससे काज आसान हो जाता था।

रंधू हरिजन के लिए आगे आए प्रवीण त्रिपाठी जी। वह अब तक जाने कितनी निर्धन कन्याओं का विवाह करा चुके हैं। कल हमारी बातचीत हो रही थी तो उन्होंने बताया उस विवाह की जब सारी तैयारी पूरी हो गई तो रंधू के यहां ईसाई मिशनरियों के कुछ लोग पहुंचे और उन्हें बरगलाने लगे, एक ब्राह्मण अपने हरिजन बंधु के साथ कैसे खड़ा हो गया यह बात किसी से पच नहीं रही थी। खैर ईश्वर की कृपा से रंधू उनके प्रभाव में नहीं आए और विवाह सकुशल निपट गया।

दृश्य बदलता है:

पिपरा सूर्यमणि गांव के मायाशंकर मिश्र की पुत्री का विवाह होना था। मायाशंकर पान की गुमटी चलाते थे, उनका निधन असमय हो गया, परिवार में दो छोटे पुत्र और विवाह योग्य कन्या। उस कन्या के विवाह हेतु पुनः आगे आए प्रवीण त्रिपाठी जी, लेकिन इस बार उनके साथ पूरा समाज एक बिटिया के ब्याह के लिए आगे आया।

रंधू हरिजन के साथ तमाम दलित लोग आगे आए जिन्होंने ब्राह्मण कन्या के विवाह में अपना योगदान दिया। जिससे जो बन पड़ा उतना योगदान विवाह में किया। जातिवाद हारा और हिंदुत्व जीता।

हिंदू समाज का विष ऐसे दूर होता है। हिंदू समाज ऐसे एक होता है। हिंदू समाज ऐसे मुस्कुराएगा।

मैं बार बार कहता हूँ, सेवा ही एकमात्र तरीका है जिससे हम समाज में एक दूसरे के प्रति प्रेम और भाईचारा उत्पन्न कर सकते हैं और प्रवीण जी ने इसे साकार कर दिखाया है।

 

रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई