​पुलिस का सराहनीय चेहरा, पत्रकार संवाद मंच ने शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त किया,

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लखनऊ।

इतिहास गवाह है कि अवध की मिट्टी ने हमेशा सिसकियों को भी सलीका और आंसुओं को भी अदब के साथ बहना सिखाया है। मोहर्रम सिर्फ़ एक महीना नहीं बल्कि कर्बला के उन जांबाज़ों की याद में बहुत ही अक़ीदत की एक अविरल धारा है, उत्तर प्रदेश में एक अनूठी मिसाल बनकर गुज़रा।

पहले मोहर्रम के चांद के दीदार से लेकर दसवीं की ढलती शाम यानी शाम-ए-गरीबां के सन्नाटे तक इस पूरे सफ़र को लखनऊ और पूरे सूबे ने जिस अकीदत और अमन के साथ तय किया, वह काफ़ी काबिले-तारीफ है। जब मातम के सुर बुलंद हो रहे थे, तब अज़ादारों की आँखों में आंसू थे और चेहरों पर सुरक्षा का वो सुकूं था, जो केवल एक जाबांज़ और मुस्तैद निज़ाम ही दे सकता है।

​इस मुकम्मल कामयाबी की इबारत मोहर्रम की शुरुआत से पहले ही लिख दी जाती है। उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री ने स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालते हुए साफ़ लफ़्ज़ों में हिदायत दी थी कि परंपराओं का सम्मान भी होगा और सुरक्षा का विधान भी होगा। नतीजा यह हुआ कि प्रशासन की गाइडलाइंस ज़मीन पर सुरक्षा का अभेद्य कवच बनकर उतर आईं जो सराहनीय था।

वही महानगर की चौड़ी सड़कों से लेकर पुराने शहर की उन ऐतिहासिक, तंग और संकरी गलियों तक, जहाँ से पारंपरिक ज़रीह के कदीमी जुलूस गुज़रते हैं, खाकी का हर जवान मुस्तैद खड़ा था। पुराने लखनऊ के पश्चिमी इलाक़े में तो डीसीपी ने खुद मोर्चे पर रहकर सुरक्षा की कमान अपने कंधों पर ले रखी थी, जिससे संवेदनशीलता के बीच भी सारे जुलूस बेहद ख़ूबसूरती और अमन-ओ-अमान के साथ अपनी मंजिलों तक पहुँचे।

​इस पूरे मंज़र को अपनी निष्पक्ष नज़रों से देख रहे पत्रकार संवाद मंच ने जब इस अमनपरस्ती को मुकम्मल होते देखा, तो वे भी अपनी कलम की स्याही से प्रशासन का शुक्रिया अदा करने से खुद को रोक नहीं पाए। मंच के अध्यक्ष सईद खान एवं मंच के सम्मानित सदस्यगण ने खुले मन से सुरक्षा व्यवस्था और चाक-चौबंद की भूरि-भूरि सरहना की।

उन्होंने अपने शब्दों में कहा की प्रदेश में योगो सरकार की हुकूमत है। और योगी सरकार ने व्यवस्था की परिभाषा बदल चुकी है। जो एक सराहनीय कदम है। बीते कई सालों से पुलिस जिस शिद्दत, संजीदगी और ख़ूबसूरती के साथ अपनी ज़िम्मेदारी निभा रही है, उसी का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश के किसी कोने से न तो कोई तल्खी सुनाई दी और न ही कोई झड़प दिखाई दी।

​मोहर्रम रुख्सत हो गया, अज़ाखानों के परदे झुक गए, लेकिन पीछे छोड़ गए अमन की एक ऐसी दास्तां, जो बरसों तक मिसाल के तौर पर पेश की जाएगी। पत्रकार संवाद मंच के हर एक सदस्य ने पुलिस और प्रशासन के इस जज़्बे को दिल से सलाम किया है। यह इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जब नीयत साफ़ हो और इरादे फौलादी, तो जज़्बात भी महफ़ूज़ रहते हैं और रिवायतें भी महकती रहती हैं। लखनऊ और पूरे उत्तर प्रदेश की पुलिस ने इस बार सचमुच हर नागरिक का दिल जीत लिया।

 

रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी

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