मीरजापुर।
जिलाधिकारी पवन कुमार गंगवार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला पर्यावरणीय समिति, जिला गंगा समिति एवं भारतीय वन अधिनियम 1927 द्वारा विज्ञपित धारा 4 एवं धारा-20 वन भूमि के अमलदरामद सम्बन्धी बैठक आहूत की गई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी विशाल कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी राकेश कुमार, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे विजेता, अपर जिलाधिकारी, भू०/रा० देवेन्द्र प्रताप सिंह. मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ छोटे लाल वर्मा एवं विभिन्न विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहें।
बैठक में जिलाधिकारी द्वारा जनपद में आगामी वर्षाकाल 2026 में प्रस्तावित वृक्षारोपण महाअभियान के तैयारियों की समीक्षा की गयी तथा आवश्यक दिशा निर्देश निर्गत किये गयें। जिलाधिकारी द्वारा वृक्षारोपण कार्य में बरती जाने वाली सावधानियों एवं वृक्षारोपण स्थलों का शतप्रतिशत जी०ओ० टैगिंग हेतु कार्य योजना बनाने हेतु सभी विभागों को निर्देशित किया गया तथा कराये जाने वाले वृक्षारोपण सम्बन्धित कार्ययोजना शीघ्र प्रभागीय वनाधिकारी/संयोजक के कार्यालय में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
पौधों का चयन, सुरक्षा व्यवस्था एवं रख-रखाव हेतु विशेष प्रयास करने हेतु सभी विभागों को निर्देशित किया गया। कृषकों को फलदार एवं इमरती लकड़ी वाली प्रजातियों को पौध वितरण में शामिल करने तथा जैव विविधता को संरक्षित करने हेतु पीपल, पाकड़, गुलर, बरगद, नीम, महुगनी, जामुन इत्यादि प्रजातियों को कार्य योजना में शामिल करने हेतु निर्देशित किया गया। उन्होंने निर्देशित किया

कि मैनेजमेन्ट प्लान एवं डी०पी०आर० तैयार किये जाये तथा ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबन्धन, कन्सट्रक्शन एण्ड डिमालिशन वेष्ट प्रबन्धन, हेतु सम्बन्धित विभागों द्वारा प्रस्तुत अनुपालन आख्या का परीक्षण किया गया एवं सम्बन्धित विभागों द्वारा किये जा रहे अपशिष्ट प्रबन्धन के कार्यों को समाहित करते हुए रिपोर्ट जिला गंगा समिति एवं जिला पर्यावरण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाये। आर्द्रभूमि से सम्बन्धित स्थल का चयन कर शीघ्र समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाय।
जिलाधिकारी द्वारा वन भूमि की अमलदरामद की अद्यतन प्रगति की समीक्षा की गयी। मीरजापुर जनपद में भारतीय वन अधिनियम-1927 की धारा-4 एवं धारा-20 अन्तर्गत अधिसूचित आरक्षित वन भूमि को अभिलेखों में अवशेष अमलदरामद हेतु सम्बन्धित को निर्देशित किया गया तथा राजस्व विभाग एवं वन विभाग द्वारा समन्वय स्थापित कर उक्त कार्य को शीघ्र पूर्ण कर पुनः प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया।










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