चन्दौली शहाबगंज
क्षेत्र के सैकड़ों गांव इन दिनों गंभीर बिजली संकट की मार झेल रहे हैं। लगातार हो रही अघोषित कटौती ने ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। दिन ही नहीं, रात में भी लंबे समय तक बिजली गुल रहने से लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार 18 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा करती है, लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल अलग है। कई गांवों में मुश्किल से 4 घंटे बिजली मिल पा रही है। भीषण गर्मी के बीच लगातार कटौती ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।
बिजली संकट का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। जिनके पास इनवर्टर, सोलर पैनल या जनरेटर जैसी सुविधा नहीं है, वे पूरी तरह अंधेरे और परेशानी में जीवन बिताने को मजबूर हैं। रातभर बिजली गायब रहने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं किसानों के कृषि कार्य और सिंचाई व्यवस्था भी बुरी तरह बाधित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार स्मार्ट मीटर और तकनीकी सुधारों की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर बिजली व्यवस्था बदहाल है। लोगों का आरोप है कि विभागीय जिम्मेदार सिर्फ योजनाओं का प्रचार कर रहे हैं, जबकि आम जनता बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रही है।
इस संबंध में बिजली विभाग के अवर अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि शेड्यूल के अनुसार 18 घंटे बिजली आपूर्ति निर्धारित है, लेकिन उच्च स्तर से पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि जितनी बिजली मिल रही है, उतनी ही सप्लाई क्षेत्र में दी जा रही है। उनके अनुसार कटौती शहाबगंज फीडर स्तर से नहीं, बल्कि ऊपर से की जा रही है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकार बिजली आपूर्ति को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, तो आखिर ग्रामीण क्षेत्रों में अंधेरा क्यों कायम है? क्या जिम्मेदार विभाग ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेगा, या लोग यूं ही बिजली संकट से जूझते रहेंगे? ग्रामीणों ने जल्द स्थायी समाधान की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो व्यापक जनआंदोलन खड़ा हो सकता है।
रिपोर्ट – अलीम हाशमी











Users Today : 5
Users This Year : 17446
Total Users : 30039
Views Today : 12
Total views : 59530