हनुमान का जन्मदिन दो बार मनाने के पीछे खास वजह बताई जाती है। एक हनुमान जयंती उनके जन्मदिवस के रूप में तो दूसरी विजय अभिनन्दन महोत्सव के रूप में मनाई जाती है। कथा के अनुसार, पवन पुत्र बजरंगबली बाल्यकाल से ही बहुत शक्तिशाली और ऊर्जा से भरपूर थे।
एक दिन हनुमानजी आकाश में चमकते हुए सूर्य को फल समझकर उसे खाने का प्रयास कर रहे थे। ऐसे में इंद्र उन्हें समझाने की कोशिश की, जब हनुमानजी नहीं माने तो इंद्रदेव ने क्रोधित होकर वज्र से उन पर प्रहार कर दिया। इसके चलते बजरंगबली की ठोड़ी धंस गई और वो मूर्छित हो गए। वायुदेव यह जानकर बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने क्रोध में आकर वायु को रोक दिया। इससे हवा बंद हो गई और सभी जीव संकट में आ गए।
हनुमान जी को मिला था दूसरा जीवन पूरे ब्रह्मांड पर संकट आया तो सभी देवताओं के प्रार्थना करने के बाद ब्रह्माजी ने भगवान हनुमान को दूसरा जीवन दिया। सभी देवताओं ने उन्हें कई प्रकार शक्तियां भी दी थीं। मान्यता है की जिस दिन हनुमानजी को दूसरा जीवन प्राप्त हुआ था
उस दिन चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि थी। तभी से इस दिन को हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाने लगा। इसके अलावा, पौराणिक कथाओं में बताया गया है की देवी सीता और भगवान राम ने बजरंगबली को चिरंजीवी होने का वरदान दिया था। इसी के चलते कार्तिक माह में भी हनुमान जयंती का त्योहार मनाया जाता है।










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