माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ वैकल्पिक उपचार रहते हुए , रिट क्षेत्राधिकार में राहत से इंकार !!

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लखनऊ: मामला ‘ सुल्तानपुर जिले के कादीपुर तहसील का , अभिया कला के मूल निवासिनी विजय शंकर और उनके माता की सम्पत्ति हथियाने के नियति से बड़े बेटे राम. मूर्ति वर्मा ने SDM न्यायालय में बटवारा कराने का मुकदमा दायर किया , साथ ही जिला न्यायालय में वाद करके स्थगन आदेश लिया, राजस्व संहिता की धारा 116 में विधिक प्रक्रिया अनुसार उभयपक्ष को सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान कर ,मूल्यांकन ,कब्जा, दखल ध्यान रखते हुए ,समानुपातिक बंटवारे का आदेश दिया गया.

वादी राम मूर्त ने विधिक त्रुटि आदि का गंभीर आरोप लगाते हुए दुर्भावना रोष में अयोध्या कमिश्नर के न्यायालय में, आदेश के विरूद्ध अपील किया, जिसमें उभयपक्ष को सुनते हुए, अपील निराधार मानते हुए, खारिज कर दी गई, राम मूर्ति ने विधि के विरुद्ध कहते हुए आदेश को, माननीय उच्च न्यायालय में दोनों आदेश को अपने अधिवक्ता के माध्यम से चुनौती दी, याची ने माननीय उच्च न्यायालय, खंडपीठ लखनऊ में याचिका दाखिल किया, जो नए मामलों में सूचीबद्ध था।

सुनवाई के दौरान माननीय न्यायमूर्ति आलोक माथुर की बेंच ने कैबियट कर्ता विपक्षी संख्या 3 ,4 और 5 के पक्ष के अधिवक्ता कौशलेंद्र त्रिपाठी ने याचिका के प्रारम्भिक स्तर पर आपत्ति जताई कि याचिका पोषणीय नहीं है, वहीं याचिकाकर्ता के पास वैकल्पिक उपचार है, आदेश विधिसम्मत ,नैसर्गिक न्याय सिद्धांत के अनुसार पारित किया गया है,

जिसे विकृत करने का कोई आधार नहीं दिखता, उभयपक्ष को सुनते हुए, इस तरह की ठोस दलीलों तर्कों से संतुष्टि प्रकट करते हुए माननीय न्यायालय ने याचि को राहत प्रदान करने से इंकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया ।उक्त प्रकरण में माननीय न्यायालय के इस निर्णय से विजय शंकर आदि और उनके परिजन को बड़ी राहत मिली है ।

 

रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला

 

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