वाराणसी इस मानसून में काशी में गंगा का जलस्तर लगातार बदलता रहा है। हर बार जब गंगा बढ़ती और फिर घटती है, तो घाटों पर मोती सिल्ट यानी मिट्टी की मोटी परत जमा हो जाती है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। घाटों पर जमा यह मिट्टी न केवल घाटों की साफ-सफाई को प्रभावित कर रही है, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए तर्पण करने में भी बड़ी चुनौती बन गई है। केंद्रीय जल आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार शनिवार सुबह 8 बजे तक वाराणसी में गंगा का जलस्तर प्रतिघंटा दो सेंटीमीटर की रफ्तार से घट रहा है।
वर्तमान में पितृपक्ष चल रहा है और श्रद्धालु पितरों के तर्पण के लिए घाटों पर पहुंच रहे हैं। गंगा का जलस्तर इस समय काफी घट गया है, लेकिन घाटों और गंगा के पानी के बीच जमा मिट्टी दलदल जैसी स्थिति बना रही है। इससे लोग सीधे पानी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। घाटों पर रहने वाले नाविक समाज, तीर्थ पुरोहित और रोजाना गंगा आरती करने वाले लोग इस मिट्टी को हटाने में जुटे हुए हैं। विशेष रूप से पुराने अस्सी घाट और नए अस्सी घाट पर लगभग चार-चार पंप लगाकर यह कार्य किया जा रहा है।
हालांकि लोग इस बात से नाराज हैं कि नगर निगम ने पुराने अस्सी घाट पर अभी तक कोई पंप नहीं लगाया है, जिससे घाटों की सफाई में और मदद मिल सके। अस्सी घाट पर तर्पण करने वाले सैकड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन पहुंच रहे हैं और कल पितृपक्ष का आखिरी दिन होने के कारण लाखों लोग घाटों पर जुटने का अनुमान है।
घाट पर रहने वाले बटुक महाराज ने बताया कि पंप लगाकर घाटों की सफाई नाविक समाज और तीर्थ पुरोहित पंडा समाज द्वारा कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि पुराने अस्सी घाट के प्लेटफार्म को पूरी तरह साफ करने में लगभग एक सप्ताह का समय लगेगा, लेकिन अब इतनी सफाई हो चुकी है कि श्रद्धालु आसानी से तर्पण कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि गंगा का जलस्तर दो दिनों तक तेजी से घटा था, जिसके कारण घाटों पर मिट्टी की मोटी परत दिखाई दी। हालांकि अब गंगा का जलस्तर स्थिर है और घाटों की सफाई जारी है।
रिपोर्ट विजयलक्ष्मी तिवारी










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