वाराणसी।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (Banaras Hindu University) में शनिवार की देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में एमएससी एग्रीकल्चर के छात्र की मौत हो गई। घटना के बाद ट्रामा सेंटर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और छात्र मुआवजे एवं उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार औरंगाबाद, बिहार निवासी सूरज प्रताप (उम्र 22 वर्ष), जो एमएससी एग्रीकल्चर सेकंड ईयर के छात्र थे, शनिवार देर रात लगभग 12:30 बजे अपने दो दोस्तों के साथ अवेंजर बाइक से बाल गंगाधर तिलक हॉस्टल से निकले थे। जैसे ही वे जे.सी. बोस हॉस्टल के पास पहुंचे, वहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण उनकी बाइक बैरिकेडिंग से टकरा गई।
इस दुर्घटना में सूरज प्रताप को सीने और पेट में गंभीर अंदरूनी चोटें आईं। घटना के बाद साथियों ने तत्काल एंबुलेंस की मदद से उन्हें ट्रामा सेंटर पहुंचाया। आरोप है कि वहां समय पर इलाज न मिलने और औपचारिकताओं में देरी के कारण उनकी मौत हो गई।
घायल छात्र विवेक त्रिपाठी ने बताया कि, “हम लोगों के पास उस समय हेल्थ डायरी नहीं थी, लेकिन हमने अपना आईडी कार्ड दिखाया। इसके बावजूद ट्रामा सेंटर में पहले 7700 रुपये जमा कराने को कहा गया। यदि समय पर इलाज मिल जाता तो आज सूरज प्रताप हमारे बीच जीवित होते। वह बहुत ही होनहार छात्र थे।
छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि
ट्रामा सेंटर में किसी भी घायल छात्र या व्यक्ति को बिना देरी के तत्काल इलाज दिया जाए।
कागजी औपचारिकताओं के कारण इलाज में देरी न हो।
मृतक छात्र के परिवार को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि उनके परिवार को भविष्य में किसी प्रकार की आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।
इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में शोक का माहौल है और छात्र सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था तथा चिकित्सा सुविधाओं को लेकर आवाज उठा रहे।










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