वाराणसी।
आगामी 27 फरवरी 2026 को होने वाले रंगभरी एकादशी महोत्सव को लेकर काशी में विवाद गहरा गया है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत पं. लोकपति तिवारी ने मंदिर प्रशासन पर प्राचीन परंपरा के निर्वहन में बदलाव का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस वर्ष भी बाबा विश्वनाथ की प्राचीन रजत चल प्रतिमा को पूजन हेतु मंदिर प्रांगण में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है।
नई प्रतिमा से निकलेगी पालकी यात्रा
पूर्व महंत के अनुसार प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि टेढ़ीनीम स्थित तथाकथित नई प्रतिमा, जो जर्मन सिल्वर से निर्मित बताई जा रही है, उसी से पालकी यात्रा निकाली जाएगी और गर्भगृह में पूजन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय परंपरागत व्यवस्था के विपरीत है और इससे काशीवासियों की आस्था आहत हो रही है।
अधिकारियों पर दबाव का आरोप
पं. लोकपति तिवारी ने दावा किया कि 17 फरवरी को पत्रकार वार्ता के बाद उन्होंने जिला अधिकारियों से वार्ता की थी, जिसमें अधिकारियों ने शासन स्तर के दबाव की बात कही। उनका आरोप है कि प्रशासन प्राचीन रजत प्रतिमा को मंदिर में मंगवाकर पूजन कराने में असमर्थता जता रहा है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
पूर्व महंत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि काशी जैसी पौराणिक और सांस्कृतिक नगरी में परंपराओं के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने मंडलायुक्त, मुख्य कार्यपालक अधिकारी और मंदिर प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की कि यदि परंपरा प्राचीन है तो मूल प्रतिमा को मंदिर में लाने से क्यों रोका जा रहा है।
मामला पहुंचा उच्च न्यायालय
इस प्रकरण को लेकर काशी के कुछ नागरिकों द्वारा जनहित याचिका उच्च न्यायालय में दायर किए जाने की भी जानकारी दी गई है। याचिका में मांग की गई है कि रंगभरी एकादशी की परंपरा का निर्वहन बाबा की प्राचीन रजत प्रतिमा से ही कराया जाए, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है।










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