वाराणसी :- आध्यात्मिक नगरी काशी एक बार फिर अपनी सनातन परंपरा और वैश्विक आकर्षण को लेकर चर्चा में है। विश्वप्रसिद्ध अस्सी घाट पर मंगलवार की शाम एक अनोखा विवाह समारोह आयोजित हुआ, जिसमें मैक्सिको से आए एक युगल ने गंगा की लहरों के बीच नौका पर वैदिक विधि-विधान से सात फेरे लिए।
गंगा नदी के मध्य सजी भव्य नाव पर पारंपरिक मंडप तैयार किया गया था। निर्धारित मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विवाह संस्कार प्रारंभ हुआ। हवन, पूजन, जयमाल और सिंदूरदान की रस्में पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न कराई गईं।
विवाह संस्कार संपन्न कराने वाले आचार्य दीपक पांडेय ने बताया कि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार सभी आवश्यक वैदिक परंपराओं का पालन किया गया। गंगा की शांत लहरों, धूप-दीप की सुगंध और मंत्रों की गूंज ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।
दूल्हा-दुल्हन पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में नजर आए। दूल्हे ने धोती-कुर्ता और दुल्हन ने लाल बनारसी साड़ी धारण की। घाट पर मौजूद स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने पुष्पवर्षा कर नवदम्पति को आशीर्वाद दिया। कई विदेशी पर्यटकों ने इस अद्भुत क्षण को अपने कैमरों में कैद किया।
उपस्थित लोगों ने इसे संस्कृतियों के संगम का प्रतीक बताया। उनका कहना था कि यह आयोजन भारतीय परंपराओं की वैश्विक स्वीकार्यता और काशी की आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाता है।
इस विशेष विवाह समारोह ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि प्रेम और एकता की कोई सीमा नहीं होती। भारतीय संस्कृति की गहराई और विविधता आज भी विश्वभर के लोगों को आकर्षित कर रही है।
काशी में इस तरह के आयोजन न केवल शहर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय सनातन परंपरा का संदेश पहुंचाते हैं।
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला










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