जिसमें बाबा विश्वनाथ की रजत चल प्रतिमा को महंत आवास से पालकी यात्रा निकाल कर मंदिर प्रांगण में बाबा विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में सिंहासन पर विराजमान कर काशी व देश के समस्त नागरिकों को रंग गुलाल के साथ में झांकी दर्शन करवाया जाता है, जिसमें लगभग 05 वर्षों से मंदिर प्रशासन द्वारा प्राचीन प्रतिमा को रोककर कथाकथित नकली प्रतिमा से परंपरा को सम्पन्न करवाया जा रहा है, जो की टेढ़ीनीम स्थित वाचस्पति तिवारी के आवास पर है,
जबकि प्राचीन प्रतिमा बड़ादेव स्थित मेरे आवास पर विराजित है जिसकी दैनिक पूजा अर्चना मेरे द्वारा की जाती है एवं जब भी वर्ष में होने वाली तीन परम्पराओं का आयोजन आता है तभी मंदिर प्रशासन द्वारा उसे मंदिर में न लाने के लिए मेरे आवास के बाहर सैकड़ो की संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दी जाती है, मैंने जिला प्रशासन कमिश्नर एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी से प्रत्येक वर्ष निवेदन करने की कोशिश की मगर मेरी कोई सुनवाई नहीं की जाती एवं बाबा विश्वनाथ की प्राचीन प्रतिमा को रोक कर कथाकथित नकली प्रतिमा से परम्पराओं को सम्पन्न करवाया जा रहा है
इसका कोई आज तक सही उत्तर नहीं दे सका एवं आई०जी०आर०एस० की रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन द्वारा यही कहा जाता है की दोनों परिवार में आपसी मतभेद है जिसमें प्रशासन का कोई लेना-देना नहीं है, जबकि इस तरह का कोई भी बात नहीं है। वाचस्पति तिवारी के टेढ़ीनीम स्थित आवास से नकली प्रतिमा निकालने में मुख्य सहयोगी एवं आरोपित जिसका नाम संजीव रतन मिश्रा (भानू) है
जो कि मीडिया के माध्यम से तरह-तरह की अफवाह फैलाता है, जिसका सहयोग मंदिर प्रशासन भी करता है। मंदिर कार्यपालक समिति द्वारा या जिला प्रशासन द्वारा या मंदिर न्यास के किसी प्रतिनिधि के द्वारा आज तक असली प्रतिमा का मौका मुआयना भी नहीं किया गया है, और सम्पूर्ण रिपोर्ट गलत लगाई जाती है।
मैं काशी के सभी सम्मानित समाचार पत्र/इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से यह अवगत करना चाहता हूं कि मंदिर प्रशासन से इस मामले तथा प्रकरण की जांच कर सही व्याख्या दें, जिससे बाबा विश्वनाथ की इस प्राचीन परम्परा ‘को न्याय मिल सके एवं प्राचीन रजत प्रतिमा से इस परम्परा का निर्वहन हो सके।










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