करमा/राबर्ट्सगंज, सोनभद्र
मानवाधिकारों की रक्षा के नाम पर संगठन चलाने वाले ही जब कानून को हाथ में लेने लगें, तो समाज में न्याय की उम्मीद धूमिल होने लगती है। ताजा मामला करमा थाना क्षेत्र का है, जहाँ समग्र मानवाअधिकार एसोसिएशन के राबर्ट्सगंज तहसील अध्यक्ष फारुख शाह पर एक ठेकेदार को सरेआम धमकाने, भद्दी गालियां देने और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।
पद की धौंस और गुंडागर्दी का संगम
जानकारी के अनुसार, खैराही में रेलवे पुल निर्माण का कार्य देख रहे JNL कंपनी के ठेकेदार हैदर अली के साथ फारुख शाह पुत्र स्व. बदरे आलम ने उस समय बदसलूकी की जब वह अपनी ड्यूटी कर रहे थे। बताया जा रहा है कि आरोपी फारुख शाह खुद को मानवाधिकार संगठन का तहसील अध्यक्ष बताकर क्षेत्र में दबदबा बनाने की कोशिश करता है और इसी अहंकार में उसने साइट पर पहुंचकर गाली-गलौज की।
मजदूरों ने बचाई जान, दबंगई की खुली पोल
आरोपी इतना उग्र था कि वह ठेकेदार को जान से मारने की नीयत से आगे बढ़ा, लेकिन वहां मौजूद मजदूरों ने उसे रोक लिया। मौके से भागते समय भी वह मानवाधिकार के नाम पर अपनी ‘पावर’ दिखाने और जान से मारने की धमकी देना नहीं भूला। एक तरफ जहां प्रशासन ऐसे संगठनों पर नजर रख रहा है जो समानांतर व्यवस्था चलाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं इस संगठन के पदाधिकारी का यह कृत्य उसकी असली मानसिकता को उजागर करता है।
कानूनी शिकंजे में ‘फर्जी रक्षक’
करमा पुलिस ने आरोपी फारुख शाह के खिलाफ BNS की धारा 352 और 351(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी संगठन का पद कानून से ऊपर नहीं है। मानवाधिकार की आड़ में गुंडागर्दी करने वाले तत्वों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।











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