चकिया, चंदौली शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत बेलावर ग्राम पंचायत में सरकारी धन के खुले दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। यहां हैंडपंप रिबोर के नाम पर 3,01,441की धनराशि निकाले जाने का आरोप है, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि गांव के अधिकांश हैंडपंप या तो खराब पड़े हैं या पहले जैसी ही स्थिति में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रिबोर सिर्फ फाइलों में हुआ है, जमीन पर नहीं।
पानी नहीं, लेकिन भुगतान पूरा
ग्रामीणों के अनुसार जिन हैंडपंपों को रिबोर दिखाया गया है, उनमें से कई से अब भी पानी नहीं निकल रहा। कुछ हैंडपंपों की हालत पहले जैसी ही जर्जर है। इसके बावजूद सरकारी अभिलेखों में कार्य पूर्ण दर्शाकर पूरी धनराशि का भुगतान कर दिया गया।ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा खेल कागजी कार्रवाई, फर्जी रिपोर्ट और मिलीभगत के सहारे किया गया है।
पीने के पानी को जूझते लोग, कागजों में विकास
एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर बेलावर जैसे गांवों में लोग आज भी बाल्टी लेकर दूसरे मोहल्लों में पानी भरने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में रिबोर हुआ होता, तो हैंडपंप चालू हालत में दिखाई देते।
ग्रामीणों का सीधा आरोप
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधान ने केवल कागजों में हैंडपंप रिबोर दिखाकर पैसा निकाल लिया। गांव में कोई काम नहीं हुआ। हम लोग आज भी खराब हैंडपंप के सामने खड़े होकर पानी का इंतजार करते हैं।
जांच की मांग तेज
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी से स्थलीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि मौके पर जांच हो जाए तो सच्चाई तुरंत सामने आ जाएगी।
बड़ा सवाल
बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान कैसे हुआ, तकनीकी सहायक और संबंधित विभागीय कर्मचारियों की भूमिका क्या है। क्या यह अकेला मामला है या पूरे क्षेत्र में यही पैटर्न चल रहा है।
प्रशासन की चुप्पी
मामले में अभी तक किसी जिम्मेदार अधिकारी की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला ग्रामीण विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बन सकता है।











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