बाल विकास परियोजना कार्यालय पर अवैध वसुली और लापरवाही के आरोप, दो साल से महिलाओं–किशोरियों को नहीं मिल रहा पुष्टाहार

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चकिया (चंदौली)

प्रदेश सरकार द्वारा गर्भवती, धात्री महिलाओं और किशोरियों के लिए संचालित पोषण आहार योजना चकिया क्षेत्र में धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। बाल विकास परियोजना कार्यालय चकिया पर गंभीर आरोप लगे हैं कि यहां जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता और कथित अव्यवस्था के चलते पात्र लाभार्थियों को पिछले दो वर्षों से पुष्टाहार सामग्री नहीं मिल पा रही है। मामले को लेकर फत्तेपुर गांव की महिलाओं में रोष व्याप्त है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में योजना का संचालन दिखाया जा रहा है, लेकिन वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रहा। फत्तेपुर गांव की कई गर्भवती और धात्री महिलाओं तथा किशोरियों ने बताया कि उन्हें लंबे समय से पोषण सामग्री नहीं मिली, जबकि वे नियमित रूप से पात्र सूची में दर्ज हैं। इसके बावजूद उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

मामले में शिकायतकर्ता सुनीता देवी का कहना है कि वह पिछले दो वर्षों से लगातार बाल विकास परियोजना कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई, पर आरोप है कि बिना मौके की जांच किए ही रिपोर्ट लगा दी जाती है। उनका कहना है कि “न तो कोई अधिकारी हमसे मिला और न ही वास्तविक स्थिति देखी गई।”

कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्तीयो ने भी नाम न छापने की शर्त पर आरोप लगाया कि कार्यालय का संचालन विभागीय कर्मचारियों के बजाय निजी लोगों के माध्यम से कराया जा रहा है। आरोप यह भी है कि विभिन्न बहानों से अवैध वसूली की जाती है, जिससे कार्यकर्ता और लाभार्थी दोनों परेशान हैं।

ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पात्र महिलाओं व किशोरियों को तत्काल पुष्टाहार उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। प्रशासनिक जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्ट – अलीम हाशमी

 

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