बल्दीराय सुल्तानपुर।
भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के प्रसंगों के साथ कथा में परीक्षित महराज को श्राप मिलने के बाद, गंगा तट पर महराज शुकदेव के आगमन व राजा परीक्षित को कथा सुनाने का कारण बताया तथा कथा को आगे बढ़ाते हुए भगवान के वराह अवतार की कथा में बताया कि भगवान विष्णु द्वारा पृथ्वी को रसातल से निकालने के लिए वराह अवतार लेना पड़ा
तथा ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए 5 वर्ष के ध्रुव की अटूट भक्ति से भगवान विष्णु को प्रसन्न करने की कथा सुनाई तथा बताया कि कैसे शुकदेव जी के कथा सुनाने से ज्ञान और वैराग्य का प्राकट्य राजा परीक्षित को होता है। कथा को आगे बढ़ाते हुए कथा व्यास ने बताया कि मनुष्य को लाभ देख लोभ अवश्य होता है और जहाँ पर लोभ आ जाता है उस स्थान पर पाप बढ़ जाता है और पाप बढ़ने की वजह से धरती अथवा मानव समाज दुखी हो जाता है और दुःख रूपी रसातल में डूब जाता है।
कथा व्यास बताते है की श्री भगवान को काम अर्थात रावण और कुम्भकरण को मारने के लिए एक ही अवतार लिया था और क्रोध को मारने के लिए अर्थात शिशुपाल को मारने के लिए भी एक ही श्री कृष्ण का अवतार लिया था लेकिन लोभ जैसे पाप को मारने के लिए दो दो अवतार एक वराह जी का और दूसरा नृसिंह जी का अवतार लेना पड़ा था कथा को आगे बढ़ाते हुए सुनाया किहिरण्यकशिपु ऋषि कश्यप के जुड़वा पुत्र थे। ये दोनों असुर थे और सौ वर्ष तक अपनी माँ के गर्भ में रहने के बाद जन्म लिए और इन दोनों को लोभ का अवतार माना जाता है।
जब इन दोनों ने इस दुनिया में जन्म लिया तो पूरे पृथ्वी और आकाश में बहुत तरीकों के उत्पात होने लगा और हर जगह अँधेरा सा छा गया। पृथ्वी हो या पर्वत सब कांपने लगे पशु पक्षी रोने लगे। और गांवों में अनेकों प्रकार के जानवरों के रोने की अमंगल आवाज सुनाई देने लगी और तो और गौ माता इतनी डर गयी थी की उनके स्तन से दूध की जगह खून निकलने लगा था पूरे आसमान में काले व घने बादल छा गए थे और हर जगह अँधेरा ही अँधेरा हो गया था। समुद्र भी मानव के तरह दुखी होकर ऊंची ऊँची लहरे उठाने लगा और भगवान की मूर्तियों से आंसू निकलने लगे थे सभी को लगा की अब संसार का अंत होने वाला है और सभी दुखी भाव से अपने अपने जगह पर छुपे हुए थे। ये दोनों भाई पैदा होते ही किसी पर्वत के समान विशालकाय शरीर वाले हो गये थे।
रिपोर्ट – जगदीश शुक्ला










Users Today : 91
Users This Year : 6331
Total Users : 18924
Views Today : 173
Total views : 37398