माघ मास के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी होती है, उसका नाम जया है। वह सब पापोंको हरने वाली उत्तम तिथि है | यह तिथि पवित्र होनेके साथ ही सभी पापों का नाश करने वाली है। ऐसा कहा जाता है कि जो भी इसका व्रत करते है, उसे एकादशी माता भोग और मोक्ष प्रदान करती है। इतना ही नहीं, वह ब्रह्महत्या-जैसे पाप और पिशाचता का भी विनाश करने वाली है।
इसका व्रत करने पर मनुष्यों को कभी प्रेतयोनि में नहीं जाना पड़ता। इसलिए कुछ भी हो हमें जया नाम की एकादशी का व्रत करना चाहिए। इसकी कथा के अनुसार भी माल्यवान की जया नामक एकादशी के व्रत से पिशाचता दूर हुई। पद्मपुराण में लिखा है कि जो लोग एकादशी के व्रत को करते हैं और भगवान् श्रीकृष्ण के शरणागत होते हैं, वे स्वर्ग को जाते हैं। जया ब्रह्महत्या का पाप भी दूर करनेवाली है। जिसने जया का ब्रत किया है, उसने सब प्रकार के दान दे दिए ओर सम्पूर्ण यज्ञों का अनुष्ठान कर लिया। इस माहात्म्य के पढ़ने ओर सुनने से अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है।
इस एकादशी पर किसकी पूजा की जाती है
एकादशी तिथि भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है। ऐसा कहा जाता है कि इसमें भगवान के माधव रूप की पूजा होती है। भगवान को शंख से अभिषेक कराकर चंदन अर्पित करना चाहिए। इसके बाद उन्हें तुलसी दल अर्पित करना चाहिए। जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है, उसके लिए सभी प्रकार के पापों को निवारण हो जाता है। कहा जाा है कि ऐसा करने से महापूजा का फल मिलता है। माघ महीने के देवता भगवान विष्णु और सूर्य हैं। इस महीने में भगवान सूर्य की पूजा करनी चाहिए। इससे सेहत अच्छी रहती है और उम्र भी बढ़ती है।










Users Today : 12
Users This Year : 17796
Total Users : 30389
Views Today : 16
Total views : 60271