वाराणसी- बहादुरपुर माँ यक्षिणी देवी के मंदिर पर परंपरागत तौर पर पिछले 65 वर्षों से चली आ रही कुश्ती दंगल का आयोजन इस वर्ष भी बड़े बुजुर्गों के तजुर्बे तथा नवयुवकों की युवा शक्ति की मिसाल देते हुए कुश्ती दंगल का कार्यक्रम सकुशल संपन्न किया गया पिछली कुछ समय से जिस प्रकार पुरानी परंपराओं को लोग भूलते जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर बहादुरपुर में पिछले 75 वर्षों से प्रतिवर्ष खेल की भावना से कराया जा रहा है भव्य रूप से कुश्ती दंगल का इस वर्ष भी बड़े भव्य रूप से विशाल मिले के साथ दंगल का आयोजन दीनानाथ यादव की अध्यक्षता में कराया गया
दीनानाथ जी ने कुस्ती दंगल के बारे निम्नलिखित जानकारी प्रदान की उन्होंने बताया कि दंगल कुश्ती का रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में साफ उल्लेख किया गया है दंगल कुश्ती को मल्ल युद्ध के तौर पर भी जाना जाता है। इसका उल्लेख रामायण और महाभारत में भी देखने को मिला है। जहां रामायण में रावण और बाली के युद्ध का वर्णन है, वहीं महाभारत में भीम-दुर्योधन युद्ध और भीम-जरासंध युद्ध का बखान किया गया है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख किए गए इन वर्णन से साफ हो जाता है कि दंगल कुश्ती प्राचीन काल से ही लोकप्रिय है।
दंगल कुश्ती युद्ध कला का एक प्रारूप है। जहां पहलवान मिट्टी पर इस खेल का अभ्यास करते हैं, जिसे अखाड़ा कहा जाता है। पहलवान यहां पर अपने गुरू के नेतृत्व में रहकर प्रशिक्षण हासिल करते हैं और पहलवानी के दांव पेच सीखते हैं। दंगल कुश्ती भारत के उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों में काफी प्रसिद्ध है। कुश्ती, फारसी शब्द कोश्ती से लिया गया है। जिसका मतलब रेसलिंग/किलिंग होता है। कुश्ती खेलने वाले खिलाड़ियों को पहलवान कहा जाता है और प्रशिक्षण देने वाले को उस्ताद कहा जाता है। आपको बता दें कि ये दोनों फारसी शब्द हैं।

इसके साथ ही पहले उत्तर भारत में राजा और राजकुमार मनोरंजन के लिए दंगल कुश्ती की प्रतियोगिताओं का आयोजन कराते थे। इसे देसी भाषा में कई नामों से जाना जाता है। जैसे पहलवानी, दंगल और कुश्ती। उन्होंने कुस्ती दंगा के नियम को भी विस्तार से बताया उन्होंने बताया कि दंगल कुश्ती में एक पहलवान दूसरे पहलवान को चित करने के लिए तरह-तरह की तकनीक का इस्तेमाल करता है। लेकिन बाकी खेलों की तरह कुश्ती में भी कई नियम होते हैं। जिसको ध्यान में रखते हुए पहलवानों को कुश्ती के अखाड़े में उतरना होता है। पहलावनों को कुश्ती के समय दूसरे पहलवान के पांव पर चढ़ना, मुंह और भौंह के हिस्से को पकड़ना, गला दबाना, बालों को खींचना, कपड़े खींचना और ऊंगलियों को मरोड़ना सख्त मना है।
दंगल कुश्ती में एक पहलवान का उद्देश्य अपने प्रतिद्वंद्वी के दोनों कंधों और कूल्हों को एक साथ जमीन से छूना होता है। इसके अलावा यदि आप अपने प्रतिद्वंद्वी को एक थ्रो से बाहर कर देते हैं तो वह अयोग्य हो जाता है। दंगल कुश्ती के दांव पेच
पिछले कई दशकों से भारत में दंगल कुश्ती काफी प्रसिद्ध है। दंगल कुश्ती खेल जितना देखने में रोचक और लुभावना लगता है, उतना ही ये मुश्किल होता है। दंगल कुश्ती में कई दांव पेच होते हैं, जो काफी मशहूर हैं। जिसकी मदद से पहलवान मौका पाने पर इन दांव पेच का इस्तेमाल करके अपने प्रतिद्वंद्वी को चित कर देते हैं। जिसमें कलाजंग दांव, ईरानी दांव (जिसे टंगी दांव के नाम से भी जाना जाता है), जांघिया दांव, निकाल दांव, बगलडूब दांव और सांडीतोड़ दांव काफी प्रसिद्ध हैं।
कलाजंग दांव – कलाजंग दांव में पहलवान को काफी चतुराई और फुर्ती की जरूरत होती है। इस दांव में एक पहलवान दूसरे पहलवान को पेट के बल अपने कंधे पर उठाता है। इसके बाद फिर वो अखाड़े में पीठ के बल उसे पटकता है। कलाजंग भारत का एक प्राचीन दांव है। ईरानी दांव – ईरानी दांव खासकर बड़े पहलवानों का काफी पसंदीदा दांव होता है। क्योंकि अक्सर बड़े पहलवान हल्के पहलवानों को आसानी से उठाकर पटक देते हैं। निकाल दांव: पहलवान इस दांव में अपने प्रतिद्वंद्वी पहलवान के टांगों के बीच निकलकर उन्हें उठाकर पटकते हैं। हालांकि बड़े और भारी पहलवान के खिलाफ इस दांव पेच का इस्तेमाल करना थोड़ा मुश्किल होता है।
जांघिया दांव: पहलवानों का पारंपरिक पोशाक जांघिया होता है, क्योंकि कुश्ती के समय इसे पहनना अनिवार्य है। जांघिया दांव में जो पहलवान अपने प्रतिद्वंद्वी पहलवान की जांघिया पकड़कर उसे जमीन से उठाकर पटकता है वो विजयी होता है। उन्होंने दंगल कुश्ती डाइट का विस्तार से जानकारी दी पहलवान अपने अखाड़े को मंदिर और गुरुजी को भगवान की तरह मानते हैं। पहलवान बल और बुद्धि के देवता हनुमान जी की पूजा करते हैं। इसलिए सभी पहलवान अपने आराध्य प्रभु की तरह संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। उनके लिए कुश्ती किसी पूजा और कुश्ती अखाड़ा किसी मंदिर के स्वरूप हैं।
पहलवान कुश्ती के लिए अपने खान-पान और व्यायाम (एक्सरसाइज) का खासतौर पर ध्यान रखते हैं। एक सही और संतुलित आहार पहलवानों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होता है। इसके लिए वे नियमित तौर पर व्यायाम के साथ-साथ दूध, दही, घी-मक्खन, बादाम और हरी सब्जियों का इस्तेमाल करते हैं। जो पहलवान बजरंगबली हनुमान जी को मानते हैं वो अपनी डाइट में मांसाहार (नॉनवेज) का इस्तेमाल नहीं करते हैं।
दंगल कुश्ती के आयोजन में मुख्य अतिथि रहे –
1. पंकज पटेल किसान मोर्चा किसान मोर्चा अध्यक्ष बीजेपी
2. सुजीत पाल मंडल अध्यक्ष आरजी लाइन बीजेपी
3. प्रेम पाठक पूर्व मंडल अध्यक्ष बीजेपी
4. रवि सिंह
5. पूर्व प्रधान नंदलाल
6. राजकुमार यादव प्रधान जयापुर
7. सदाबली
कार्यक्रम का आयोजक – दीनानाथ यादव निवासी बहादुरपुर
कार्यक्रम के सहाययोजक
1. श्याम नारायण यादव निवासी नरसड़ा
2. जय सिंह यादव निवासी बहादुरपुर
3. विकास यादव निवासी बहादुरपुर
4. रमेश यादव निवासी बहादुरपुर










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