वाराणसी: यूपी में वाराणसी के विश्वप्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट के रेनोवेशन कार्य को लेकर खड़े हुए विवाद ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह पर FIR दर्ज होने के बाद उन्होंने तीखा पलटवार किया है। संजय सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि उन्हें मुकदमों से डराने की कोशिश न की जाए।
यह FIR मणिकर्णिका घाट पर चल रहे विकास कार्य के दौरान सोशल मीडिया पर भ्रामक, फर्जी और AI जनरेटेड फोटो व वीडियो साझा करने से जुड़ी है। आरोप है कि इन पोस्ट्स के जरिए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई और समाज में भ्रम व आक्रोश फैलाया गया।
क्या है पूरा मामला?
वाराणसी का मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म में मोक्ष स्थल के रूप में जाना जाता है। यहां सरकार द्वारा विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। इसी दौरान सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट्स वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि घाट पर स्थित मंदिर तोड़े जा रहे हैं, देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमाएं और कलाकृतियां नष्ट की गई हैं।
प्रशासन और ठेकेदार कंपनी का कहना है कि ये तस्वीरें और वीडियो फर्जी या AI के जरिए मॉडिफाइड हैं। इनसे न केवल गलत जानकारी फैली, बल्कि धार्मिक भावनाएं भी आहत हुईं। इसी को लेकर ठेकेदार कंपनी के प्रतिनिधि ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
8 लोगों के खिलाफ FIR
शिकायत के आधार पर वाराणसी पुलिस ने चौक थाने में AAP सांसद संजय सिंह , कांग्रेस नेता पप्पू यादव, जसविंदर कौर समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोपों में भ्रामक जानकारी फैलाना, धार्मिक सद्भाव बिगाड़ना और सोशल मीडिया के जरिए भ्रम उत्पन्न करना शामिल है। मामले की जांच साइबर सेल को सौंपी गई है।
संजय सिंह का तीखा बयान
FIR दर्ज होने के बाद संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, BJP वालों, मेरे ऊपर मुकदमा लिखकर मुझे डराने-धमकाने की कोशिश मत करो। तुम्हारे आकाओं ने पहले भी मुझ पर बहुत FIR की हैं।
उन्होंने आगे कहा, तुमने मंदिरों को तोड़ने का पाप किया है, जिसका सबूत सामने है। आंख खोलकर देखो। FIR उन पापियों पर करो जिन्होंने मंदिर तोड़ा है।
संजय सिंह ने FIR को राजनीतिक साजिश करार दिया और कहा कि वे इससे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे कोर्ट में लड़ेंगे और सच्चाई सामने आएगी।
राजनीतिक रंग लेता विवाद
संजय सिंह का दावा है कि मणिकर्णिका घाट पर वास्तव में मंदिर और प्रतिमाएं तोड़ी गई हैं और यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में हुआ है। वहीं प्रशासन का कहना है कि यह मामला फर्जी अफवाह फैलाने का है, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती थी।
यह विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। AAP और कांग्रेस के नेता विकास कार्य को मंदिर तोड़ने से जोड़ रहे हैं, जबकि सरकार और प्रशासन इसे विकास विरोधी अफवाह फैलाने की कोशिश बता रहे हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी वाराणसी दौरे के दौरान विकास कार्यों की समीक्षा की थी।











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