चंन्दौली धानापुर सकलडीहा तहसील के गुरैनी घाट पर जीवित्पुत्रिका व्रत करने वाली महिलाओ द्वारा पुत्रों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना के लिए यह व्रत रखने के साथ डूबते हुए सूर्य को अर्ग दिया गया। यह व्रत विशेष रूप से पुत्र की रक्षा और उसके उत्तम भविष्य के लिए किया जाता है। महिलाएँ इस दिन सिन्दूर, रंग-बिरंगे वस्त्र, पूजा सामग्री आदि के साथ पूजन करती हैं और व्रत नियमों का पालन किया करती है ।
जीवित्पुत्रिका गुरैनी घाट जैसे पवित्र घाट पर किया जाता है। ताकि नदी की पवित्रता का लाभ भी मिल सके तथा लोगों का आशीर्वाद भी मिलता रहे। महिलाएँ जल में पत्तल रखकर पूजा करती हैं। जीवित पुत्र का नाम लेकर उसकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं। इस व्रत का उद्देश्य पुत्र के स्वास्थ्य, दीर्घायु और कल्याण की कामना करना है। व्रत पूर्ण करने के बाद प्रसाद वितरित किया जाता है। जिसके क्रम प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मानों द्वारा अपने पुत्रों की लंबी उम्र की कामना को लेकर व्रत रखा गया वहीं जिन परिवारों में नई शादी संपन्न हुई थी उन लोगों द्वारा एक समूह के रूप में गोठ में जाने का प्रावधान भी है।
जिसके क्रम में विवाहित परिवार के समस्त सदस्य गण नए-नए परिधान ग्रहण करते हैं तथा फूल माला तरह-तरह के पकवान तैयार कर धूल नगाड़े के साथ नाचते गाते हुए एक घाट पर एकत्रित होते हैं तथा वहां देव की उपासना करने के पक्ष अपनी गंतव्य को रवाना होते हैं वही भर्ती महिलाओं द्वारा पुत्र की कामना पूर्ण होने के पश्चात दूसरे दिन जल ग्रहण किया जाता है। वही इस व्रत में पूरे दिन माता द्वारा एक बूंद पानी का भी सेवन नहीं किया जाता है जिसके कारण इसे निर्जला या खरजूतियां भी कहा जाता है।











Users Today : 29
Users This Year : 18000
Total Users : 30593
Views Today : 51
Total views : 60717