*काशी l* संगठित समाज ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण करता है l छत्रपति शिवाजी ने हिंदुओं को संगठित करने का कार्य प्रारंभ किया और दक्षिण भारत में हिंदुओं का संगठन होने पर ही हिंदू पादपद शाही की स्थापना संभव हो पाई l उक्त विचार काशी दक्षिण भाग के माधव नगर के सुंदरपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र सेवा प्रमुख युद्ध वीर जी ने व्यक्त किया l राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष में आयोजित हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता ने कहा कि पांच परिवर्तन के पांच सूत्र व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र तक सकारात्मक परिवर्तन की दिशा दिखाते हैं l सामाजिक समरसता की व्याख्या करते हुए वक्त ने कहा कि जाति ,वर्ग ,भाषा और क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर एकात्मक समाज का निर्माण ही सामाजिक समरसता है l पारिवारिक विघटन की समस्या को बताते हुए क्षेत्र सेवा प्रमुख ने बताया कि परिवार को संस्कारवान संवाद और सहभागिता का केंद्र बनाकर राष्ट्र चेतना का संवर्धन करना ही कुटुंब प्रबोधन है l उन्होंने स्वदेशी की आवश्यकता को समझाते हुए कहा कि स्वावलंबन स्थानीय उत्पादन स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग और आत्मनिर्भर भारत यही स्वदेशी की परिकल्पना है l कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गांधी मेमोरियल स्कूल सुंदरपुर के प्रबंधक अभिजीत सिंह ने कहा कि किसी चीज को सुनने की क्षमता होनी चाहिए क्योंकि वक्ता वही अच्छा होता है जब श्रोता सुनता है उन्होंने आत्मा से परमात्मा के भाव को बताया l
कार्यक्रम के प्रारंभ में काशी हिंदू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ममता जी,रेलवे से सेवानिवृत छांगुर प्रसाद एवं धर्मागम विभाग से सेवानिवृत भक्ति पुत्रम रोहितम जी सहित मंचासीन अतिथियों ने भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलंकर कार्यक्रम को आरंभ प्रारंभ किया l हिंदू सम्मेलन में बच्चों द्वारा गीता श्लोक का पाठ, मातृ शक्तियों द्वारा भजन की प्रस्तुति ,एकल गीत ,शिव स्तुति आदि भावपूर्ण कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई l कार्यक्रम के समापन भारत माता की आरती से किया गया l हिंदू सम्मेलन में मुख्य रूप से सर्वश्री जयप्रकाश लाल कुलाधिपति ,केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड ,रांची, प्रोफेसर श्रवण कुमार सिंह विभाग अध्यक्ष कृषि विज्ञान संस्थान ,bhu,प्रोफेसर जनार्दन शर्मा पूर्व उपनिदेशक पशुपालन विभाग सहित बड़ी संख्या में नागरिक एवं मातृ शक्ति उपस्थित रहे l

*आस्था ,श्रद्धा के केदो पर कुठाराघात करने वालों पर नियंत्रण आवश्यक है – नरेंद्रानंद सरस्वती जी*
*काशी l* आस्था श्रद्धा के केदो पर कुठाराघात करने वालों पर नियंत्रण आवश्यक है l वेदों में एक वाक्य है “शठे शाठ्यम समाचरेत” अर्थात बुरे के साथ बुरा बर्ताव ही शोभा देता है l उक्त विचार काशी दक्षिण भाग के गंगानगर में शिवपुरी कॉलोनी स्थित पार्क में सकल हिंदू समाज द्वारा आयोजित हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ता के रूप में सुमेरु पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने व्यक्त किया l राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित हिंदू सम्मेलन में मुख्य वक्ता ने कहा कि जब जब भारतीय समाज पर आक्रांताओं का प्रभाव बढ़ा है तब तब किसी महापुरुष ने उनका विरोध किया है l 21 दिसंबर से 27 दिसंबर तक का यह शहीदी सप्ताह गुरु गोविंद सिंह के चार साहिबजादों के बलिदान को स्मरण दिलाता है l महामना मालवीय जी के जन्मदिवस को स्मरण करते हुए वक्ता ने कहा कि मालवीय जी ने भी हिंदू मानवर्धन हेतु अनेक कार्य किया l वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर वक्ता ने बताया कि 18वीं शताब्दी में मैक्स मूलर द्वारा स्थापित यह शिक्षा प्रणाली बदलने की आवश्यकता है l शिक्षा केदो में गीता ,रामायण ,महाभारत शिवाजी ,रानी लक्ष्मीबाई जैसे विषयों को पढ़ाया जाना चाहिए l वर्तमान में मंदिर मस्जिद विवाद पर वक्ता ने कहा कि आक्रांताओं द्वारा 2600 से ज्यादा मंदिरों का विध्वंस किया गया था जिसमें से केवल तीन मंदिरों को वापस करने की बात हो रही है l पूज्य शंकराचार्य जी ने बताया कि कुछ वर्षों पहले तक ऐसा समय था जब चारों ओर बम फट रहे थे सैनिकों और जनता के मरने पर पार्टी का आयोजन होता था l परंतु वर्तमान में हिंदू समाज के संगठित होने से कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मुक्ति मिली, राम मंदिर अपने पूर्ण वैभव के साथ खड़ा है l पांच परिवर्तन के संदर्भ में वक्त का कहना था कि स्वदेशी को जीवन में लाना आवश्यक है l पांच परिवर्तन का जो दूसरा बिंदु कुटुंब प्रबोधन है उसे संदर्भ में पूज्य शंकराचार्य जी ने बताया कि पारिवारिक संस्कार बालक बालिकाओं को केवल बड़े परिवारों में रहकर ही आ सकते हैं दहेज एवं भ्रूण हत्या का निषेध परिवारों में होना चाहिए भाई का भाई से स्नेह बना रहे l प्राचीन भारत में समरसता का उदाहरण देते हुए शंकराचार्य जी ने कहा कि वेदव्यास की माता निषाद समुदाय से थी परंतु फिर भी वेदव्यास को उतना ही सम्मान प्राप्त है l मनु ने चार वर्णों में सभी मनुष्यों को विभाजित किया था ,परंतु वर्तमान में 10000 से ज्यादा जातियों में वर्गीकरण है l मातृशक्ति की सुरक्षा पर शंकराचार्य जी का कथन था कि बेटियों को आत्मरक्षा अवश्य सीखना चाहिए l माताएं 15 मिनट संतान को प्रतिदिन नैतिक शिक्षा दें। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रज्ञा ओझा ने बताया कि हिंदू समाज में मातृशक्ति की भूमिका वंदनीय है माता ही संतान को संस्कारवान बनाती है l द्वितीय विशिष्ट अतिथि श्री संतोष भारती जी ने बताया कि हम सब हिंदू एक ही परम एक ही पिता की संताने हैं l हमारी पहचान केवल एक हिंदू होना चाहिए l कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काशी प्रांत के सह प्रांत प्रचारक सुनील जी की विशेष उपस्थिति रही l
कार्यक्रम के प्रारंभ में अखिलेंद्र शास्त्री एवं अंशिका द्वारा भजनों की सुंदर प्रस्तुति की गई इसके बाद सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ हुआ l मंचासीन अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलंकर कार्यक्रम को विधिवत प्रारंभ किया गया l श्री चंद्रनाथ ओझा द्वारा काव्य पाठ किया गया l
मंच पर सुमेर पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी के पादुका का पूजन हुआ l हिंदू सम्मेलन के कार्यक्रम का विषय परिचय प्रख्यात बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर वैभव जायसवाल ने किया l कार्यक्रम के अंत में भारत माता की सामूहिक आरती की गई और सभी ने वंदे मातरम का गायन किया l कार्यक्रम का संचालन सुनीलकिशोर एवं धन्यवाद ज्ञापन राजेश पाठक ने किया l
रिपोर्ट रोशनी











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