वाराणसी। दिगंबर जैन समाज काशी के तत्वावधान में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि काशी की पावन धरती पर भगवान पार्श्वनाथ की शोभायात्रा का शुभारंभ करना उनके लिए सौभाग्य और गर्व का विषय है।
शोभायात्रा ग्वालदास साहू लेन स्थित पंचायती दिगंबर जैन मंदिर से बड़े ही हर्षोल्लास और धार्मिक श्रद्धा के साथ निकाली गई। विशाल चांदी के गजरथ पर भगवान पार्श्वनाथ की भव्य प्रतिमा विराजमान थी। शोभायात्रा में सुसज्जित घोड़ों पर समाज के बच्चे सवार थे, जबकि सजे-धजे रथों पर देवताओं के रूप में जैन दंपतियों ने जुलूस की शोभा बढ़ाई। एक विशाल हाथी प्रभु के रथ को खींचता हुआ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।
शोभायात्रा के मार्ग में दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने फूलों की पंखुड़ियां बरसाकर प्रभु का स्वागत किया। जैन समाज के श्रद्धालु भक्ति में तल्लीन होकर भजन गाते हुए चल रहे थे। भजनों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। शोभायात्रा बांस फाटक, जगमबाड़ी, सोनारपुरा और भेलूपुर होते हुए प्रभु पार्श्वनाथ की जन्मस्थली पहुंचकर संपन्न हुई।
जन्मस्थली पर 108 रजत कलशों से विश्व शांति के लिए पूजन-अभिषेक किया गया। इस अवसर पर असम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और पूजन में सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान संयोजक एवं उपाध्यक्ष राकेश जैन ने काशी में स्थित चार जैन तीर्थंकरों की जन्मस्थलियों के समग्र विकास की मांग रखी।
इस पर उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार स्टांप एवं पंजीयन रविंद्र जायसवाल ने आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार काशी के जैन तीर्थों के विकास को लेकर गंभीर है और शीघ्र ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष ऋषभ चंद्र जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन का नेतृत्व उपाध्यक्ष संजय जैन और प्रधानमंत्री प्रदीप जैन ने किया। शोभायात्रा के संचालन में विनोद जैन, सौरभ जैन, आलोक जैन, पवन जैन, कमल बागड़ा, श्रुति जैन, प्रमिला सांवरिया, डॉ. कमलेश चंद जैन, पंडित फूलचंद प्रेमी और किशोर जैन सहित अनेक प्रमुख लोगों का सहयोग रहा। संपूर्ण कार्यक्रम का सफल संचालन राकेश जैन द्वारा किया गया।










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