भारतीय लोकतंत्र की मूल आत्मा उसकी लोकतांत्रिक संरचना और स्वतंत्र मीडिया में निहित है। मीडिया न केवल सूचनाओं का माध्यम है, बल्कि शासन–प्रशासन की गतिविधियों पर जनता की निगाह बनाए रखने वाला प्रहरी भी है। ऐसे में यदि मीडिया और पत्रकार असुरक्षित महसूस करते हैं, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर होना स्वाभाविक है। इन्हीं चिंताओं को दूर करने तथा पत्रकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करने के उद्देश्य से “राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग” द्वारा बिहार में अपना संगठनात्मक विस्तार किया गया है।
इस विस्तार में कई दिग्गज पत्रकार और सामाजिक रूप से सक्रिय लोग सम्मिलित किए गए हैं, जिसका उद्देश्य न केवल संगठन को मजबूत करना है। बल्कि पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा और पेशेवर मानकों को नई दिशा देना भी है।
आज पत्रकारिता पहले जैसी नहीं रह गई है। टेक्नोलॉजी ने इसकी पहुँच तो बढ़ा दी है, पर खतरों को भी कई गुना तीखा कर दिया है। सच कहना अक्सर कई शक्तिशाली वर्गों को चुभता है। बिहार जैसे राज्यों में यह समस्या गहरी है। सच्चे पत्रकारों को ट्रोल और हमलों का निशाना बनाया जाता है। छोटे शहरों में काम कर रहे पत्रकार सबसे अधिक जोखिम झेलते हैं। इन्हीं चुनौतियों के मद्देनजर पत्रकारों को एकजुट, सुरक्षित और सक्षम बनाने का जिम्मा “राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग” ने उठाया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष निशिकांत राय ने बताया कि देशभर में पत्रकार लगातार चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। सच लिखने की कीमत उन्हें कभी धमकी, कभी हत्या के प्रयास, कभी फर्जी मुकदमों के रूप में चुकानी पड़ती है। यही स्थिति देखकर उन्होंने “राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग” की नींव रखी। इसका विधिवत उद्घाटन डी–125, थर्ड फ्लोर, महावीर इंक्लेव, नई दिल्ली–110045 में हुआ। यह संस्था डॉ. जाकिर हुसैन एजुकेशन ट्रस्ट (रजि.) की एक इकाई है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष निशिकांत राय, जो स्वयं बिहार के मुंगेर जिले से आते हैं, वर्षों से पत्रकारों की पीड़ा, संघर्ष और जोखिम के वातावरण को बहुत करीब से महसूस कर चुके हैं। उन्होंने देखा है कि न कोई सुरक्षा नीति, न आर्थिक सहायता, न कानूनी सहयोग, न प्रशिक्षण और न ही पत्रकारों के लिए कोई राष्ट्रीय स्तर का एकजुट मंच। इस कमी ने उन्हें ऐसी व्यवस्था बनाने की प्रेरणा दी जहाँ पत्रकार अपनी आवाज बुलंद कर सके और खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।
निशिकांत राय स्पष्ट कहते हैं कि आयोग का उद्देश्य केवल कागजी दस्तावेज तक सीमित नहीं है। यह एक वास्तविक और जमीनी संगठन है जिसके लक्ष्य गहरे और दीर्घकालिक हैं। आयोग के प्रमुख उद्देश्य पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना। पत्रकारों के खिलाफ होने वाले अपराधों की कानूनी सहायता।
सत्ता, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के स्तर पर पत्रकार सम्मान नीतियों का निर्माण। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, वेब/डिजिटल, सभी पत्रकारों को एक मंच पर लाना। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के पत्रकारों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था। प्रशिक्षण, वर्कशॉप और पत्रकारिता मानकों को मजबूत करना। यह सब मिलकर भारत में पत्रकारिता को नई दिशा और गति देने का वादा करता है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बिहार में तेज गति से विस्तार करने की जिम्मेदारी उपाध्यक्ष नीरव समदर्शी और सचिव जी. एन. भट्ट को दी है। दोनों ने अपने नेतृत्व कौशल और संगठनात्मक क्षमता के साथ कम समय में व्यापक टीम का गठन कर लिया है।
बिहार में चयनित पदाधिकारियों में प्रदेश अध्यक्ष- जितेन्द्र कुमार सिन्हा, उपाध्यक्ष- नीरव समदर्शी, सचिव- जी. एन. भट्ट, तिरहुत प्रमंडल अध्यक्ष- शंभू प्रसाद सिंह, अररिया जिला अध्यक्ष- सुमन ठाकुर, गया जिला अध्यक्ष- विकास कुमार, कार्यकारिणी सदस्य- त्रिलोकी नाथ प्रसाद, सदस्य- सुरेंद्र कुमार रंजन, सदस्य- मुन्ना पंडित, सदस्य- रमेश कुमार, सदस्य- पिंटू कुमार, यह टीम बिहार में संगठन को जमीन से जोड़ने वाली मुख्य धुरी के रूप में काम करेगी।
बिहार एक ऐसा राज्य है जहाँ पत्रकार अक्सर राजनीतिक दबाव, सांस्कृतिक-सामाजिक जटिलता, अपराध जगत के हस्तक्षेप, प्रशासनिक चुनौतियों से जूझते हुए काम करते हैं। डिजिटल मीडिया के आने से अवसर बढ़े हैं, पर साथ ही फेक न्यूज, डिजिटल ट्रोल, आईटी एक्ट के गलत इस्तेमाल, साइबर धमकियों जैसी नई समस्याएँ सामने आई हैं। बिहार में आयोग का विस्तार पत्रकारों को कानूनी संरक्षण, सामाजिक सम्मान, एकता का मंच, प्रशिक्षण और आधुनिक पत्रकारिता कौशल उपलब्ध कराएगा।
ऐसे कई मामलों में पत्रकारों पर फर्जी मुकदमे, मानहानि मामले, धमकियाँ, पुलिसिया प्रताड़ना की शिकायतें आती हैं। आयोग ऐसे हर मामले में कानूनी टीम गठित करेगा। ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर मानसिक दबाव बहुत अधिक होता है। आयोग समय–समय पर काउंसलिंग, तनाव व्यवस्थापन वर्कशॉप, डिजिटल सुरक्षा प्रशिक्षण, नैतिक पत्रकारिता सेशन आयोजित करेगा।
प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार सिन्हा की भूमिका और उनका मुख्य लक्ष्य बिहार में पत्रकारों के बीच मजबूत नेटवर्क बनाना, जिला और प्रमंडल स्तर पर संगठन खड़ा करना और पत्रकारों की समस्याओं को राज्य मुख्यालय तक पहुँचाना है।
उपाध्यक्ष नीरव समदर्शी को संगठन का विस्तार करने और सदस्यता अभियान का दायित्व दिया गया है। बिहार के सभी प्रमुख जिलों में तेजी से सदस्य बढ़ाने की शुरुआत इन्हीं के निर्देशन में हुई है।
सचिव जी. एन. भट्ट की जिम्मेदारी संगठन की नीतियों और कार्यक्रमों को दस्तावेजी रूप देना तथा हर जिले के नेताओं से समन्वय बनाए रखना है।
जब पत्रकार को पता होगा कि उसके पीछे एक सशक्त संगठन खड़ा है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ेगा। आयोग की उपस्थिति पत्रकारों को उस साहस के साथ लिखने में सहायता देगी जिसकी आज आवश्यकता है। आज युवाओं को पत्रकारिता में करियर बनाने से डर लगता है। पर अब यह मंच उन्हें नई दिशा प्रदान करेगा। यह संगठन जनता के हितों की रक्षा में भी परोक्ष रूप से योगदान देगा।
जल्द ही आयोग झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा और महाराष्ट्र में किए जा रहे विस्तार की घोषणा करेगा। दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर का पत्रकार सुरक्षा सम्मेलन आयोजित करने की योजना है। पत्रकारों की आकस्मिक सहायता के लिए ” पत्रकार सुरक्षा कोष ” बनाए जाने की भी चर्चा है।











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