कृषि शिक्षा, शोध और किसानों की समृद्धि के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत करते हुए, बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बाँदा और वाराणसी के चोलापुर क्षेत्र की अग्रणी संस्था चोलापुर कल्याण फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (जयश्री नर्सरी), बबियाव, वाराणसी के बीच मंगलवार को तकनीकी हस्तांतरण और बागवानी विकास पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह साझेदारी विशेष रूप से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) मॉडल पर आधारित है,
जिसका मुख्य लक्ष्य बुंदेलखंड एवं आसपास के क्षेत्रों में उद्यानिकी (Horticulture) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना तथा विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत फल प्रजातियों की गुणवत्तापूर्ण पौध किसानों के लिए सुलभ बनाना है।कुलपति प्रो. एसवीएस राजू ने इस पहल को बुंदेलखंड की विशिष्ट परिस्थितिकी (जल संकट और शुष्क जलवायु) के अनुकूल एक टिकाऊ और लाभदायक कृषि मॉडल बताते हुए कहा कि उद्यानिकी कम पानी में भी अधिक आय सुनिश्चित करने का प्रभावी विकल्प है, और यह किसानों को विश्वस्तरीय कृषि मानकों के अनुरूप खेती करने के लिए प्रेरित करेगा।
विश्वविद्यालय की ओर से प्रो. एस. वी. द्विवेदी व एफपीओ की ओर से निदेशक शैलेन्द्र रघुवंशी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. सत्यव्रत द्विवेदी ने उद्यान महाविद्यालय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह तकनीकी हस्तांतरण कार्यक्रम का ज्ञान एवं शोध केंद्र बनेगा, जिससे कृषि शिक्षा को व्यवहारिक धरातल पर बल मिलेगा।
फल विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. आनंद सिंह ने पुष्टि की कि इस PPP के माध्यम से, एफपीओ विश्वविद्यालय के सहयोग से उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधों को वैज्ञानिक तकनीक से तैयार करेगा। निदेशक प्रशासन डॉ. नरेंद्र सिंह और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुभाष चंद्र सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा
कि यह समझौता किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर प्रदान करके बुंदेलखंड को पारंपरिक खेती से हटाकर आधुनिक, लाभदायक और टिकाऊ बागवानी की ओर ले जाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम साबित होगा।








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