मिर्जापुर (छानबे)
निबी गहरवार गांव के कुरौथी सागर गौशाला में 21, 22 और अब 23 अगस्त 2026 को लिए गए GPS फोटो ने साफ कर दिया है कि यह गौशाला नहीं, गायों के लिए यातना शिविर बन चुकी है। फोटो में शेड के अंदर कीचड़-गोबर में मरी पड़ी गायें, खाली नांद, सड़ा हुआ भूसा, दीवार चाटती गाय और एक ही गड्ढे में एक के ऊपर एक फेंकी गई लाशें साफ दिख रही हैं।
23 अगस्त का नया सबूत
रविवार 23 अगस्त 2026 सुबह 07:31 बजे (Lat 25.207602°, Long 82.37786°, कुरौथी सागर, गैपुरा-जोपा रोड) का फोटो सबसे ताजा सबूत है। शेड के अंदर एक सफेद गाय फर्श पर मरी पड़ी है। शरीर पूरी तरह सूख चुका है, पसलियां और हड्डियां साफ निकली हुई हैं, चमड़ी पर घाव और कीचड़ चिपका है। गाय के सिर के पास पशु आहार की हरी-सफेद बोरियां पड़ी हैं,
जिन पर वह दम तोड़ चुकी है। पास में धातु की नांद में थोड़ा सा बचा-खुचा चारा दिख रहा है। फर्श गंदा और गीला है। पीछे एक और गाय के पैर दिख रहे हैं। यह फोटो साबित करता है कि अधिकारियों के निरीक्षण और लगातार शिकायतों के बावजूद मौत का सिलसिला नहीं रुका।
21 अगस्त के फोटो
सुबह करीब 10:31 बजे के फोटो में शेड के अंदर 6-7 गायें एक साथ मरी पड़ी हैं। फर्श पर पानी-गोबर की गीली कीचड़ है। नांद में चारा नहीं है। गायों की पसलियां साफ निकली हुई हैं। एक युवक लाशों के बीच खड़ा है। दूसरे फोटो में नांद में काला-सड़ा भूसा गोबर मिला हुआ पड़ा है। एक गाय दीवार चाट रही है, जो कैल्शियम और मिनरल की भारी कमी का लक्षण है।
22 अगस्त के फोटो
सुबह 08:23 से 08:43 बजे के बीच (Lat 25.204094° से 25.208859°, Long 82.377225° से 82.377656°) के फोटो और भी भयावह हैं। शेड में एक गाय पशु आहार की खाली हरी बोरी पर मरी पड़ी है। शरीर में सिर्फ हड्डी और चमड़ा बचा है। पास ही दूसरी गाय भी कीचड़ में मरी है। खुले अहाते में 40-50 गायें खड़ी हैं, सभी की हड्डियां निकली हुई हैं, नांद खाली है। कई के कान पर टैग भी नहीं है।
सबसे क्रूर तस्वीर गड्ढे वाली है। एक ही कच्चे गड्ढे (मात्र 5-7 फीट गहरा) में 5-6 गायों को एक के ऊपर एक फेंका गया है। कोई चूना-नमक नहीं डाला गया। पांच लोग मिलकर एक और मरी गाय को लकड़ी के ठेले पर घसीट कर ला रहे हैं। गाय का सिर जमीन में लटक रहा है, सींग घिस रहे हैं। सुबह 8:43 तक छठी गाय भी फेंकी जा रही थी।
इन्हीं फोटो में 21 अगस्त को CVO, BDO और DDO समेत 5-6 अधिकारी भी दिख रहे हैं। पृष्ठभूमि में मरी गायें पड़ी हैं। पानी की हौदी में हरा-सड़ा पानी भरा है। अधिकारी हाथ बांधे खड़े हैं, जबकि NGO संचालक कुछ समझा रहा है। निर्देशों के बावजूद 22 और 23 अगस्त को भी लाशें शेड में पड़ी और गड्ढे में फेंकी जा रही थीं।
उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के मानकों के अनुसार हर पशु को रोज 15 किलो हरा चारा + 3-4 किलो भूसा + 1.5 किलो दाना + मिनरल मिक्सचर और 60 लीटर साफ पानी मिलना चाहिए। फर्श सूखा और रोज साफ होना चाहिए। 100 प्रतिशत टैगिंग, डेली हेल्थ रजिस्टर और मृत पशु का पोस्टमार्टम अनिवार्य है। यहां नांद खाली, सड़ा भूसा, हरी काई वाला पानी, घुटने भर कीचड़, 50 प्रतिशत बिना टैग के पशु और बिना पोस्टमार्टम के गड्ढे में फेंकना साफ दिख रहा है।
कागज पर 271 पशु दर्ज हैं, जबकि फोटो बताते हैं कि रोज मौत हो रही है। डॉक्टरों का बयान कि “इम्युनिटी खत्म हो चुकी है, दवा से जिंदा नहीं रख सकते” भी भूखमरी की ओर इशारा करता है। यह पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(1)(h) और (j) के तहत संज्ञेय अपराध है।
ग्रामीणों की मांग है कि जिलाधिकारी खुद भौतिक सत्यापन करें, सभी GPS फोटो (21, 22 और 23 अगस्त) को साक्ष्य मानकर FIR दर्ज हो, गौशाला NGO से लेकर पशुपालन विभाग के अधीन हो, 271 पशुओं की वीडियोग्राफी के साथ गिनती हो और CCTV फुटेज जब्त हो।
ये तीन दिनों के GPS टाइमस्टैम्प वाले फोटो अब सबसे मजबूत कानूनी सबूत हैं।
(फोटो: 23 अगस्त 2026 सुबह 07:31 बजे कुरौथी सागर गौशाला में बोरी के पास मरी गाय)










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