युवा सत्संग महोत्सव में शिक्षा, संस्कार और जीवंत गुरु की भूमिका पर हुआ मंथन

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वाराणसी

काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित शताब्दी कृषि प्रेक्षागृह भवन में श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र के दर्शन एवं विचारों से प्रेरित संस्था “Be Ye Concentric” की ओर से आयोजित एक दिवसीय युवा सत्संग महोत्सव का रविवार को समापन हुआ। महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए युवा, विद्यार्थी, प्रोफेसर, फैकल्टी एवं नॉन-फैकल्टी सदस्य तथा स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

महोत्सव का मुख्य विषय “Education Beyond Degrees” रहा। इसके अंतर्गत शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य, जीवन में डिग्री के साथ ज्ञान और ध्यान की आवश्यकता, संस्कार, व्यक्तित्व निर्माण तथा “The Role of Guru” यानी जीवन में गुरु की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से मंथन हुआ।

वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना और रोजगार हासिल करना नहीं है। शिक्षा का वास्तविक प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार, आदतों, चरित्र, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारियों में दिखाई देना चाहिए। युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति, परंपरा और जीवन-मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में जीवन में जीवंत गुरु की आवश्यकता और गुरु की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि सही मार्गदर्शन व्यक्ति को अपनी क्षमताओं को पहचानने, जीवन में सही दिशा चुनने और सकारात्मक रूप से आगे बढ़ने में सहायता करता है। ध्यान को मानसिक एकाग्रता, आत्मचिंतन और संतुलित जीवन के लिए उपयोगी बताया गया।

महोत्सव में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने युवाओं से संवाद किया। इनमें आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. शशांकशेखर मंडल, पीजीआईएमईआर एवं कैपिटल हॉस्पिटल, भुवनेश्वर के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. गुरुदत्त दास, आईएमएस, बीएचयू के जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. सत्येंद्र कुमार तिवारी तथा वैज्ञानिक ‘एफ’ एवं संयुक्त निदेशक डॉ. जुबिली पुरकायस्थ प्रमुख रहे।

विशेषज्ञों ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक प्रभाव व्यक्ति के आचरण और व्यवहार में दिखाई देना चाहिए। इसी संदर्भ में श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र के विचार—“जैसा व्यवहार और जैसी आदतें हों, उसी मात्रा में वह शिक्षा भी है”—को महोत्सव की मूल भावना से जोड़ा गया।

आयोजन के दौरान युवाओं के बीच शिक्षा, संस्कार, व्यक्तित्व निर्माण और जीवन-मूल्यों को लेकर संवाद हुआ। इसके साथ ध्यान एवं आध्यात्मिक चिंतन के सत्र भी आयोजित किए गए। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ युवाओं को जीवन के मूल्यों, आत्मअनुशासन और सकारात्मक सोच से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

महोत्सव में आयोजित विशेष लाइव म्यूजिकल कॉन्सर्ट ने भी युवाओं में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया। संगीत, संवाद, ध्यान और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के माध्यम से युवाओं को शिक्षा के व्यापक अर्थ और जीवन में उसके महत्व को समझने का अवसर मिला।

समापन अवसर पर आयोजकों ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को केवल डिग्री तक सीमित शिक्षा नहीं, बल्कि ऐसा ज्ञान चाहिए जो उन्हें बेहतर इंसान, जिम्मेदार नागरिक और समाज के प्रति संवेदनशील व्यक्ति बनाए। शिक्षा, संस्कार, संस्कृति, ध्यान और जीवंत गुरु के मार्गदर्शन के संदेश के साथ एक दिवसीय युवा सत्संग महोत्सव संपन्न हुआ।

 

रिपोर्ट: धनेश्वर साहनी

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