प्रयागराज
स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय में डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल ऑपरेशन कर 40 वर्षीय मरीज की बाईं किडनी से 37 पथरियां सफलतापूर्वक निकाल दीं। दो घंटे से अधिक चले इस ऑपरेशन में किडनी को बीच से अलग कर पथरियों को बाहर निकाला गया।
मध्य प्रदेश के रीवा निवासी शत्रुघ्न को गंभीर किडनी संक्रमण और फेल्यर की स्थिति में अस्पताल लाया गया था। उनकी हालत इतनी नाजुक थी कि उन्हें वेंटिलेटर और डायलिसिस पर रखना पड़ा। परिवार के अनुसार मरीज करीब एक साल से दोनों किडनियों में पथरी की समस्या से पीड़ित थे और घरेलू उपचार करवा रहे थे। एक महीने से तेज बुखार व सांस लेने में कठिनाई बढ़ने पर उन्हें शहर के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. दिलीप चौरसिया ने बताया कि भर्ती के समय मरीज का सीरम क्रिएटिनिन स्तर 4.2 था। सेप्सिस और किडनी फेल्यर के कारण हालत बेहद गंभीर थी। तीन दिन तक वेंटिलेटर पर रखने और हेमोडायलिसिस करने के बाद उन्हें मेंटेनेंस डायलिसिस पर शिफ्ट किया गया।
दोनों किडनियों में 4.5 से 6 सेंटीमीटर तक की बड़ी पथरियां होने के कारण टीम ने पहले बाईं किडनी का ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। 21 अगस्त को पीएमएसएसवाई यूरोलॉजी ऑपरेशन थिएटर में एनाट्रॉफिक पायलोलिथोटॉमी प्रक्रिया अपनाई गई। इसमें किडनी को नियंत्रित तरीके से खोलकर अंदर की सभी 37 पथरियां निकाली गईं। किडनी की मरम्मत के बाद 5/26 डबल-जे (डीजे) स्टेंट लगाया गया। ऑपरेशन के दौरान लगभग 20 मिनट के लिए रीनल आर्टरी को क्लैंप किया गया।
एनाट्रॉफिक पायलोलिथोटॉमी एक जटिल शल्य प्रक्रिया है, जिसमें बहुत बड़ी या कई पथरियों को निकालने के लिए किडनी को सावधानीपूर्वक दो हिस्सों में खोलकर मरम्मत की जाती है।
ऑपरेशन का नेतृत्व प्रो. डॉ. दिलीप चौरसिया ने किया। टीम में डॉ. शिरीष मिश्रा और डॉ. गजेंद्र शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. धर्मेंद्र यादव, डॉ. प्रगति सक्सेना, डॉ. अर्ची सिंह, डॉ. कमल और डॉ. शिवमोहन मौजूद थे।
एसआरएन अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग ने एक बार फिर जटिल किडनी सर्जरी में सफलता हासिल कर चिकित्सा क्षेत्र में अपनी क्षमता का परिचय दिया है।









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